ट्रंप के सबसे भरोसेमंद युवा सारथी सर्जियो गोर संभालेंगे भारत में कमान, कूटनीति के नए युग की शुरुआत

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मस्क का 'सांप' अब भारत में: ट्रंप के इस चौंकाने वाले फैसले से मोदी सरकार को क्या है बड़ा संदेश?
मस्क ने जिसे सांप बताया, उसे भारत भेज ट्रंप मोदी सरकार को देना चाह रहे क्या संदेश, सर्जियो गौर अगले सप्ताह संभालने वाले हैं अपना पदभार

ट्रंप के सबसे भरोसेमंद ‘युवा सारथी’ सर्जियो गोर संभालेंगे भारत में कमान: कूटनीति के नए युग की शुरुआत

भारत-अमेरिका संबंधों के एक बेहद अहम मोड़ पर, अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर अगले सप्ताह भारत की धरती पर कदम रखने जा रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पिछले साल नामित किए गए गोर, 12 जनवरी को औपचारिक रूप से अपना पदभार ग्रहण करेंगे। सिर्फ 38 वर्ष की आयु में भारत में सबसे युवा अमेरिकी राजदूत बनने का गौरव हासिल करने वाले गोर के पास दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के विशेष दूत की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। वह अपना परिचय पत्र प्रस्तुत कर आधिकारिक तौर पर नई दिल्ली में कमान संभालेंगे।

गोर का आगमन ऐसे समय में हो रहा है जब रूस से तेल की खरीद पर ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत दंडात्मक शुल्कों ने दोनों देशों के रिश्तों में हल्की तल्खी पैदा कर दी है। पिछले साल अक्टूबर में अमेरिकी सीनेट की मुहर लगने के बाद गोर की नियुक्ति पक्की हुई थी। इससे पहले अगस्त में, ट्रंप ने उन्हें ‘राष्ट्रपति कार्मिक निदेशक’ से पदोन्नत कर भारत में राजदूत और विशेष दूत जैसे कद्दावर पदों की जिम्मेदारी सौंपी थी।

सितंबर में अपनी नियुक्ति की पुष्टि के दौरान गोर ने भारत को एक ऐसा ‘रणनीतिक साझेदार’ बताया था, जिसका भविष्य वैश्विक विकास की दिशा तय करेगा। उन्होंने साफ किया कि वह इस महत्वपूर्ण साझेदारी में अमेरिकी हितों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। ‘पॉलिटिको’ की रिपोर्ट के अनुसार, गोर की नियुक्ति केवल टैरिफ विवाद सुलझाने या प्रशासनिक पुनर्गठन के लिए नहीं है, बल्कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए ट्रंप का एक सीधा संदेश है। राष्ट्रपति अपने सबसे करीबी व्यक्ति को भेजकर यह जताना चाहते हैं कि अब दोनों देशों के बीच बातचीत का स्तर बेहद ‘गंभीर’ होने वाला है।

ट्रंप के पूर्व सलाहकार स्टीव बैनन ने भी गोर की क्षमताओं पर भरोसा जताया है। हालांकि बैनन मानते हैं कि गोर को भारतीय नीतिगत मुद्दों का गहरा अनुभव नहीं है, लेकिन वे उन्हें एक ‘तेज तर्रार’ व्यक्ति मानते हैं जिस पर राष्ट्रपति आंख मूंदकर भरोसा करते हैं। बैनन के शब्दों में, “अगर मैं प्रधानमंत्री मोदी की जगह होता, तो इस रिश्ते को मजबूत करने के लिए सर्जियो गोर से बेहतर विकल्प की कल्पना नहीं कर सकता था।”

सर्जियो गोर का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। नवंबर 1986 में तत्कालीन सोवियत संघ (अब उज्बेकिस्तान) के ताशकंद में जन्मे गोर का परिवार 1999 में अमेरिका आकर बस गया था। उन्होंने 2020 के ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (MAGA) अभियान के दौरान ट्रंप के साथ अपना करियर शुरू किया और अपनी काबिलियत के दम पर व्हाइट हाउस के राष्ट्रपति कार्मिक कार्यालय के निदेशक पद तक पहुंचे। अब उनके कंधों पर दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के रिश्तों को नई दिशा देने का बड़ा जिम्मा है।


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