पाकिस्तान में एक बड़े राजनीतिक दांव की आहट: क्या सेना प्रमुख आसिम मुनीर बनने वाले हैं देश के असली ‘सुल्तान’?
पाकिस्तान के शक्तिशाली सैन्य प्रमुख, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, देश की राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। उनके प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहलगाम हमले और भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद, व्हाइट हाउस में पाकिस्तान की ओर से स्वयं फील्ड मार्शल मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। यह किसी भी देश के लिए असामान्य है, जहां आमतौर पर राष्ट्राध्यक्ष या प्रधानमंत्री ही इस तरह की उच्च-स्तरीय मुलाकातों का नेतृत्व करते हैं। लेकिन पाकिस्तान की राजनीति की पटकथा कुछ अलग ही लिखी जाती है, जहां सेना का साया हमेशा गहरा रहा है।
अब, पाकिस्तान एक ऐसे कदम की ओर बढ़ रहा है, जिससे सेना के आगे पहले से ही झुकी हुई सरकार की भूमिका और गौण हो जाएगी, और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की शक्ति और भी बढ़ जाएगी। पाकिस्तान ने एक विवादास्पद संवैधानिक संशोधन का प्रस्ताव आगे बढ़ाया है, जिसे व्यापक रूप से मुनीर की स्थिति और शक्ति को सुरक्षित करने के लिए तैयार किया गया माना जा रहा है।
27वें संविधान संशोधन का खुलासा: एक रहस्यमयी ट्वीट से गरमाई सियासत
इस 27वें संविधान संशोधन की योजनाओं का खुलासा दुनिया और पाकिस्तान के लिए आश्चर्यजनक रूप से पीपीपी प्रमुख बिलावल भुट्टो-जरदारी के एक ट्वीट के माध्यम से हुआ। बिलावल ने यह राज खोला कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संवैधानिक संशोधन पर समर्थन के लिए उनकी पार्टी से संपर्क साधा है।
संविधान संशोधन पर घमासान: अनुच्छेद 243 पर टिकी निगाहें
प्रस्तावित संशोधनों में संवैधानिक न्यायालयों और न्यायाधीशों के स्थानांतरण से संबंधित प्रावधान शामिल हैं, लेकिन अनुच्छेद 243 में होने वाले बदलाव चिंता का विषय हैं। अनुच्छेद 243 पाकिस्तानी सशस्त्र बलों की कमान और नियंत्रण से संबंधित है। वर्तमान संविधान के अनुसार, संघीय सरकार का सशस्त्र बलों पर नियंत्रण और कमान होगी।
हालांकि शरीफ सरकार ने इस कदम पर चुप्पी साध रखी है, अनुच्छेद 243 में संशोधन के प्रस्ताव को आसिम मुनीर की स्थिति और शक्ति को मजबूत करने के एक कदम के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि नागरिक मामलों में सेना का दबदबा और बढ़ेगा। ऐसे देश में, जहाँ सेना ने लंबे समय से नागरिक शासन पर अपना वर्चस्व बनाए रखा है, यह कोई नई बात नहीं है।
फील्ड मार्शल का पद और आसिम मुनीर का भविष्य
इस साल की शुरुआत में, भारत के साथ तीन दिनों की शत्रुता में पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाने के कुछ हफ़्ते बाद, मुनीर को फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया था। अयूब खान के बाद यह पद पाने वाले वे दूसरे सेना प्रमुख बने। खान ने सैन्य तख्तापलट के बाद खुद को इस पद पर नियुक्त किया था। पिछले साल, एक विवादास्पद कदम के तहत, पाकिस्तान के सेना प्रमुखों का कार्यकाल तीन साल से बढ़ाकर पांच साल कर दिया गया था, और 64 साल की आयु सीमा भी हटा दी गई थी।
हालांकि, फील्ड मार्शल के पद को वर्तमान में पाकिस्तान के संविधान में कोई कानूनी दर्जा प्राप्त नहीं है, जिससे मुनीर का भविष्य अस्पष्ट है। आधिकारिक तौर पर, मुनीर कुछ हफ़्ते बाद, इसी साल 28 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। अब, अनुच्छेद 243 में संशोधन को लेकर हो रही चर्चा को मुनीर को एक सुरक्षित और विस्तारित पद प्रदान करने के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों की चेतावनी: नागरिक-सैन्य असंतुलन में वृद्धि की आशंका
भू-राजनीतिक विश्लेषकों और पाकिस्तान के भीतर से भी उठ रही आवाजों ने प्रस्तावित कदम को संवैधानिक आवरण के तहत सैन्य प्रभाव को मजबूत करने का एक प्रयास बताया है। उनका मानना है कि इससे लंबे समय से चले आ रहे नागरिक-सैन्य असंतुलन को और गहरा किया जाएगा।
इसमें कोई शक नहीं कि पिछले कुछ महीनों में मुनीर एक वास्तविक राष्ट्राध्यक्ष के रूप में उभरे हैं। उन्होंने इतने ही महीनों में तीन बार अमेरिका का दौरा किया है, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की है, और न सिर्फ रक्षा नीति, बल्कि विदेश संबंधों और आर्थिक नियोजन पर भी गहन विचार-विमर्श किया है। यह सब पाकिस्तान की बदलती राजनीतिक गतिशीलता का संकेत है, जहां सेना का प्रभाव पहले से कहीं अधिक स्पष्ट होता जा रहा है।
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