ताइवान की घेराबंदी: आसमान में 13 फाइटर जेट और समंदर में 6 चीनी जहाजों के साथ ड्रैगन की नई हिमाकत।

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ताइवान की घेराबंदी: आसमान में 13 फाइटर जेट और समंदर में 6 चीनी जहाजों के साथ ड्रैगन की नई हिमाकत।
Taiwan Strait में फिर बढ़ा तनाव, China के 13 फाइटर जेट और 6 जहाजों ने की घेराबंदी

ताइवान सीमा पर चीन की ‘गर्जना’: आसमान में मंडराते विमान और लहरों पर युद्धपोत

ताइवान की सीमाओं पर एक बार फिर सैन्य तनाव गहरा गया है। ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने बुधवार सुबह 6 बजे (स्थानीय समय) तक अपने समुद्री क्षेत्र के आसपास चीनी सैन्य गतिविधियों की एक बड़ी लहर दर्ज की। प्राप्त जानकारी के अनुसार, चीनी सैन्य विमानों की 13 उड़ानों और 6 नौसैनिक जहाजों की हलचल देखी गई। इसमें सबसे चिंताजनक बात यह रही कि 11 चीनी विमानों ने ‘मिडियन लाइन’ (मध्य रेखा) को पार करते हुए ताइवान के उत्तरी और दक्षिण-पश्चिमी रक्षा क्षेत्रों में घुसपैठ की। ताइवान की सेना ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए न केवल इन पर कड़ी नजर रखी, बल्कि त्वरित जवाबी कार्रवाई भी की। पीएलए (PLA) विमानों और जहाजों की इस सक्रियता ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय जगत का ध्यान इस संवेदनशील क्षेत्र की ओर खींच लिया है।

बदलते समीकरण: 9 साल बाद साथ आए जापान और दक्षिण कोरिया

एशियाई क्षेत्र में बढ़ते इस तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव भी देखने को मिल रहा है। दक्षिण कोरिया और जापान ने चीन और उत्तर कोरिया से बढ़ते सुरक्षा खतरों के मद्देनजर, 9 वर्षों में पहली बार अपने द्विपक्षीय नौसैनिक खोज और बचाव अभ्यास को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई है। सियोल के रक्षा मंत्रालय ने इसकी पुष्टि करते हुए इसे सैन्य आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। टोक्यो और बीजिंग के बीच संबंध उस समय और अधिक तनावपूर्ण हो गए थे, जब जापान की ओर से ताइवान पर चीनी हमले को ‘अस्तित्व के लिए खतरा’ बताया गया था। जापान का मानना है कि ऐसी स्थिति उसे सैन्य कार्रवाई करने के लिए मजबूर कर सकती है।

चीन का अडिग रुख: ‘एक देश, दो व्यवस्था’ पर दावा

इन सैन्य गतिविधियों के बीच बीजिंग ने एक बार फिर अपना कड़ा रुख स्पष्ट किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, ताइवान चीन का एक अविभाज्य हिस्सा है और 1949 के विभाजन के बावजूद वह मुख्य भूमि से अलग नहीं है। चीन की ‘एक देश, दो व्यवस्था’ नीति के तहत, देश का पूर्ण एकीकरण चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और सरकार का एक ‘ऐतिहासिक मिशन’ है। बीजिंग का मानना है कि ताइवान का एकीकरण दुनिया भर में रहने वाले चीनी लोगों की साझा आकांक्षा है और वह इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, चाहे इसके लिए बल प्रयोग की स्थिति ही क्यों न बने।


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