ट्रंप के ‘बड़बोले’ चेले पीटर नवारो का भारत पर ज़हर, ‘बातचीत की मेज पर आ रहा है भारत’ का दावा

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"ट्रंप के 'बड़बोले' चेले पीटर नवारो का भारत पर ज़हर, 'बातचीत की मेज पर आ रहा है भारत' का दावा"
India US Trade Talks | Donald Trump के बड़बोले चेले Peter Navarro ने उगला जहर, बोले- ‘भारत बातचीत की मेज पर आ रहा है’

भारत-अमेरिका व्यापार की गरमागरम बहस: टैरिफ के ‘महाराजा’ पर अमेरिका का वार!

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों में गर्माहट के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुख्य व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने एक बार फिर भारत पर “सबसे ज़्यादा टैरिफ” लगाने का आरोप लगाया है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दोनों देशों के शीर्ष नेता भारत-अमेरिका संबंधों की अहमियत को रेखांकित कर रहे हैं।

राजधानी दिल्ली में भारतीय और अमेरिकी अधिकारियों के बीच अहम व्यापार वार्ता के शुरू होने से ठीक पहले, व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने तल्ख लहजे में कहा कि भारत “बातचीत की मेज पर आ रहा है” और उन्होंने दोहराया कि दुनिया के प्रमुख देशों के मुकाबले भारत पर सबसे अधिक शुल्क (टैरिफ) लागू हैं। उनकी यह तीखी टिप्पणियां, राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच की मंगलवार को प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर दिन भर चलने वाली वार्ता से ठीक पहले आई हैं।

“सीएनबीसी” को दिए एक साक्षात्कार में नवारो ने सोमवार को कहा, “भारत बातचीत की मेज पर आ रहा है… शुल्क का महाराजा।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक “बहुत ही सौहार्दपूर्ण, अच्छे, रचनात्मक” ट्वीट का भी जिक्र किया और कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने उस पर प्रतिक्रिया दी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले सप्ताह ही कहा था कि भारत और अमेरिका स्वाभाविक साझेदार हैं और दोनों देशों की टीमें द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में जुटी हुई हैं। उनका यह बयान ट्रंप की उस टिप्पणी के जवाब में आया था, जिसमें उन्होंने दोनों देशों के बीच “व्यापार बाधाओं” को दूर करने के प्रयासों की बात कही थी।

नवारो ने आगे कहा, “हम देखेंगे कि यह कैसे काम करता है। लेकिन व्यावहारिक रूप से, हम जानते हैं कि व्यापार के मोर्चे पर उनके शुल्क किसी भी बड़े देश की तुलना में सबसे ज्यादा हैं। उनके गैर-शुल्क अवरोध भी बहुत ऊंचे हैं। हमें इससे वैसे ही निपटना पड़ा है जैसे हम हर दूसरे देश के साथ निपट रहे हैं जो ऐसा करता है।”

रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर अक्सर भारत को निशाना बनाने वाले नवारो ने कहा कि भारत ने 2022 में यूक्रेन पर हमले से पहले ऐसी आपूर्ति नहीं खरीदी थी। उन्होंने दावा किया, “हमले के तुरंत बाद भारतीय रिफाइनर रूसी रिफाइनरों के साथ मिल गए… यह ‘पागलपन’ है क्योंकि वे अनुचित व्यापार में हमसे पैसा कमाते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी कर्मचारी इससे प्रभावित होते हैं।

नवारो ने तर्क दिया, “फिर वे उस पैसे का इस्तेमाल रूसी तेल खरीदने के लिए करते हैं, और फिर रूसी उससे हथियार खरीदने के लिए करते हैं, और फिर हमें करदाताओं के रूप में यूक्रेन की रक्षा के लिए और अधिक भुगतान करना पड़ता है। तो यह कैसे हो सकता है?”

बता दें कि ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को दोगुना करके 50 प्रतिशत कर देने के बाद, भारत और अमेरिका के संबंध पहले ही प्रभावित हुए हैं। अमेरिका ने भारत पर रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क भी लगाया है, जिसे भारत ने “अनुचित और अविवेकपूर्ण” करार दिया है। भारत अपनी ऊर्जा खरीद का बचाव करते हुए कहता रहा है कि यह राष्ट्रीय हित और बाजार की गतिशीलता से प्रेरित है।


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