ट्रंप की कूटनीति: गाजा से रूस-यूक्रेन की ओर, क्या ‘टॉमहॉक’ सुलझाएंगे जंग?
इजराइल-हमास संघर्ष के थमने के बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब अपना सारा ध्यान रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने पर केंद्रित कर रहे हैं। यह एक ऐसा दांव है जिसके लिए उन्होंने अपनी 2024 की चुनावी महत्वाकांक्षाओं के मंच पर भी जोर-शोर से आवाज़ उठाई थी, तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडन की नीतियों पर तीखी आलोचना करते हुए।
ट्रंप, जो पहले भी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधे संवाद स्थापित करने की कोशिश कर चुके हैं, अब यूक्रेन को लंबी दूरी की ‘टॉमहॉक’ मिसाइलें देने पर विचार कर रहे हैं। इस कदम का उद्देश्य मॉस्को को वार्ता की मेज पर लाने के लिए दबाव बढ़ाना है। इन मिसाइलों की 1,600 किलोमीटर तक की मारक क्षमता यूक्रेन को रूसी क्षेत्र के भीतर गहरे लक्ष्यों को भेदने की अभूतपूर्व शक्ति प्रदान करेगी।
हालांकि, पुतिन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यूक्रेन को ऐसी मिसाइलें प्रदान करना एक ‘लक्ष्मण रेखा’ को पार करने जैसा होगा, जिससे मॉस्को और वाशिंगटन के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध और भी बिगड़ जाएंगे। बावजूद इसके, ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वह पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
गाजा में युद्धविराम के बाद, ट्रंप ने आशा व्यक्त की है कि रूस-यूक्रेन युद्ध की समाप्ति की दिशा में भी प्रगति दिखाई देगी। इस वर्ष यह चौथी बार होगा जब ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की आमने-सामने होंगे। इन वार्ताओं से पहले, ट्रंप की ‘टॉमहॉक’ मिसाइल वाली रणनीति निश्चित रूप से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक नया अध्याय खोलेगी।
इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन सीनेट में लंबित एक प्रस्ताव पर भी विचार कर रहा है, जो रूस से तेल, गैस और यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क लगाने का प्रावधान करता है। यह कदम रूस की आर्थिक शक्ति को कमजोर करने और उसे युद्ध समाप्त करने के लिए मजबूर करने की एक और रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप की यह बहुआयामी कूटनीति, जो गाजा से शुरू होकर अब रूस-यूक्रेन की ओर बढ़ रही है, आने वाले समय में वैश्विक शांति की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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