यूक्रेन का भारत पर ‘डीजल’ दांव: आयात पर लगेगी रोक!

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यूक्रेन का भारत पर 'डीजल' दांव: आयात पर लगेगी रोक!
भारत को लेकर यूक्रेन ने कर दिया ऐलान, नहीं खरीदेंगे डीजल

यूक्रेन का भारत से डीजल आयात पर यू-टर्न: रूसी तेल का साया?

यूक्रेन की प्रतिष्ठित एनर्जी कंसल्टिंग फर्म एनकोर ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। फर्म के अनुसार, यूक्रेन 1 अक्टूबर से भारत से डीजल की खरीद पूरी तरह से बंद करने वाला है। यह कदम भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद को देखते हुए उठाया जा रहा है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एनकोर के हवाले से यह जानकारी दी है।

यह प्रतिबंध यूक्रेन की अपनी ऊर्जा सुरक्षा और रूसी प्रभाव से दूरी बनाए रखने की मंशा को दर्शाता है। एनकोर का कहना है कि यूक्रेनी सुरक्षा एजेंसियों ने भारत से खरीदे गए सभी डीजल की गहन जांच के आदेश दिए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसमें किसी भी तरह के रूसी घटक मौजूद न हों।

प्रमुख यूक्रेनी रिफाइनरी का बंद होना और आयात में बदलाव

एक अन्य कंसल्टिंग फर्म, एन 9, ने इस साल की शुरुआत में बताया था कि एक प्रमुख यूक्रेनी तेल रिफाइनरी को गर्मियों में बंद करना पड़ा था। इस रिफाइनरी को बंद करने का एक मुख्य कारण यूक्रेनी व्यापारियों को भारत से डीजल खरीदकर आयात करने की चुनौतियों का सामना करना था। यह उल्लेखनीय है कि यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय ने भी पहले भारत से डीजल का आयात किया है, जिसकी गुणवत्ता को अच्छा माना जाता रहा है।

रूसी हमलों का असर और आयात स्रोतों में बदलाव

रूस द्वारा लगातार किए जा रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों ने यूक्रेन की तेल रिफाइनरी और ऊर्जा क्षेत्र के भंडारों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इन हमलों से यूक्रेन की रिफाइनरी और तेल स्टोरेज फैसिलिटीज बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

युद्ध की शुरुआत से पहले, यूक्रेन अपनी घरेलू उत्पादन की कमी को पूरा करने के लिए मुख्य रूप से बेलारूस और रूस से डीजल ईंधन का आयात करता था। हालांकि, 2022 के बाद से, यूक्रेन ने अपने आयात स्रोतों को बदलते हुए मुख्य रूप से पश्चिमी यूरोपीय देशों का रुख किया है।

आंकड़े क्या कहते हैं?

एनकोर के अनुसार, यूक्रेन ने अगस्त में 119,000 टन भारतीय डीजल ईंधन का आयात किया था, जो उस महीने के कुल डीजल आयात का 18% था। वहीं, ए-95 कंसल्टिंग फर्म ने बताया कि वर्ष की पहली छमाही में यूक्रेन के डीजल ईंधन का आयात पिछले साल की तुलना में 13% घटकर 2.74 मिलियन मीट्रिक टन रह गया।

यूक्रेन का यह कदम यह दर्शाता है कि वह अपनी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने और रूसी तेल के प्रभाव से मुक्त रखने के लिए कड़े कदम उठाने को तैयार है, भले ही इसके लिए उसे अपने मौजूदा आयात स्रोतों में बदलाव करना पड़े।


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