अमेरिका का चीन पर तीखा हमला: ‘आतंकवाद को फंडिंग देना बंद करे बीजिंग’, ट्रंप के दौरे से पहले बढ़ा तनाव
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान के साथ गहरे ऊर्जा संबंधों को लेकर चीन पर ‘आतंकवाद के सबसे बड़े प्रायोजक को वित्त पोषित करने’ का गंभीर आरोप लगाया है। बेसेंट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बीजिंग को अब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के वाशिंगटन के प्रयासों का समर्थन करना चाहिए। बीजिंग और तेहरान के रिश्तों पर यह तीखी टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी चीन यात्रा के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करने वाले हैं।
बेसेंट का तर्क है कि चीन द्वारा ईरान से भारी मात्रा में किया जा रहा ऊर्जा आयात सीधे तौर पर ईरानी शासन की जड़ों को मजबूत कर रहा है। सोमवार को एक समाचार चैनल से बात करते हुए उन्होंने कहा, “ईरान दुनिया में आतंकवाद का सबसे बड़ा केंद्र है और चीन उसकी ऊर्जा का 90 प्रतिशत हिस्सा खरीद रहा है। सीधे शब्दों में कहें तो, वे आतंकवाद के सबसे बड़े नेटवर्क को पैसा मुहैया करा रहे हैं।”
इस कड़ी बयानबाजी के बीच, अमेरिकी अधिकारी ने बीजिंग से अपना रुख बदलने और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग को सुरक्षित करने के लिए वाशिंगटन के नेतृत्व वाले अभियान में शामिल होने की अपील की है। वर्तमान में इस मार्ग पर ईरान का प्रभाव और अवरोध बना हुआ है। क्षेत्रीय तनाव का जिक्र करते हुए बेसेंट ने कहा, “ईरानी हमलों के कारण यह जलडमरूमध्य बंद हो गया है, जिसे अब हम फिर से खोल रहे हैं। मैं चीन से आग्रह करता हूं कि वह इस अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा अभियान में हमारे साथ आए।”
यह आह्वान राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हाल ही में घोषित “प्रोजेक्ट फ्रीडम” के तहत किया गया है। इस मिशन का उद्देश्य जलमार्ग में फंसे जहाजों को सुरक्षित ‘मार्गदर्शन’ प्रदान करना है। गौरतलब है कि ट्रंप पहले ही तेहरान को चेतावनी दे चुके हैं कि इस मिशन में किसी भी तरह की बाधा डालना उसे भारी पड़ सकता है।
बेसेंट ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अमेरिका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अब ईरानियों का ‘कोई नियंत्रण’ नहीं चलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा, “इस जलडमरूमध्य पर अब हमारा पूर्ण नियंत्रण है।” इसके साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि यदि चीन वास्तव में कूटनीतिक सफलता चाहता है, तो उसे तेहरान पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कहा, “अब यह देखना बाकी है कि क्या चीन अपनी कूटनीति से ईरान को यह जलमार्ग खोलने के लिए राजी कर पाता है या नहीं।”
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