ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन की हुंकार: ‘पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हो, मैं 1992 से ही था अनुच्छेद 370 हटाने का पक्षधर’
ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत के प्रति अपना अडिग समर्थन दोहराते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पूरे केंद्र शासित प्रदेश को भारत में फिर से शामिल किया जाना चाहिए। ब्लैकमैन ने जोर देकर कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की उनकी मांग कोई नई नहीं है, बल्कि यह तीन दशक से भी अधिक पुरानी है। उन्होंने साफ किया कि उनकी यह मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा 2019 में लिए गए फैसले से बहुत पहले की है। जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशनल क्लब में आयोजित एक ‘हाई-टी’ कार्यक्रम के दौरान ब्लैकमैन ने बताया कि उनका यह स्टैंड 1990 के दशक की शुरुआत में ही बन गया था, विशेषकर उस दौर में जब घाटी से कश्मीरी पंडितों का पलायन हुआ था।
ब्लैकमैन ने अपनी बात रखते हुए कहा, "मैंने अनुच्छेद 370 को हटाने की मांग तब नहीं शुरू की जब पीएम मोदी ने इसे अपने घोषणापत्र में शामिल किया, बल्कि मैंने यह आवाज 1992 में ही बुलंद कर दी थी।" उन्होंने उस समय को याद किया जब कश्मीरी पंडितों को उनके घरों से जबरन बेदखल किया गया था। ब्रिटिश सांसद ने अपनी पुरानी सक्रियता का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने ब्रिटेन में विस्थापित समुदाय के साथ हो रहे घोर अन्याय की ओर वैश्विक ध्यान खींचने के लिए काफी प्रयास किए थे। उन्होंने कहा कि उस दौर में हमने एक विशाल जनसभा इसलिए की थी ताकि दुनिया को बताया जा सके कि धर्म और पृष्ठभूमि के आधार पर लोगों को उनके पूर्वजों के घरों से निकालना सरासर गलत और अन्यायपूर्ण है।
अपनी बेबाक टिप्पणियों के दौरान, उन्होंने क्षेत्र में पनप रहे आतंकवाद की कड़ी निंदा की और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान के नियंत्रण को अवैध करार दिया। ब्लैकमैन ने कहा, "मैंने न केवल आतंकवाद का विरोध किया है, बल्कि जम्मू-कश्मीर की रियासत के हिस्सों पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे की भी आलोचना की है। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि जम्मू-कश्मीर की पूरी रियासत को ‘भारत के ताज’ के नीचे फिर से एकजुट होना चाहिए।" उनके ये विचार जुलाई 2025 में उनके द्वारा दिए गए पिछले बयानों के अनुरूप ही हैं, जब उन्होंने पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 लोग मारे गए थे) पर गहरा दुख व्यक्त किया था। एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा था कि भले ही फिलहाल शांति दिख रही हो, लेकिन स्थिति अब भी नाजुक है। अंत में, उन्होंने ब्रिटिश सरकार से अपील की कि वह आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ मजबूती से खड़ी रहे, क्योंकि नई दिल्ली अब पश्चिमी देशों के साथ सुरक्षा के मोर्चे पर और अधिक घनिष्ठ सहयोग की उम्मीद कर रही है।
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