आरबीआई का दिसंबर का सरप्राइज? ब्याज दरों में 25 bps की कटौती की उम्मीद!
नई दिल्ली: क्या दिसंबर में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) अपनी नीतिगत दरों में 25 आधार अंकों (bps) की कटौती का तोहफा दे सकता है? एक नई रिपोर्ट के अनुसार, यह संभव है! अगर इस साल के अंत तक 50% आयात शुल्क जारी रहता है, तो रेपो दर 5.25% तक गिर सकती है। मंगलवार को सामने आई इस रिपोर्ट ने आर्थिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
विकास की रफ्तार पकड़ने की तैयारी?
एचएसबीसी के आंकड़ों के मुताबिक, सरकार न केवल विकास को गति देने के लिए नए आर्थिक सुधारों की घोषणा कर सकती है, बल्कि निर्यातकों के लिए एक आकर्षक राजकोषीय पैकेज भी ला सकती है। यह कदम अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
मुद्रास्फीति का ग्राफ नीचे, आरबीआई के लिए खुला मैदान!
सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि मुद्रास्फीति अपने निम्नतम स्तर पर आ गई है। सितंबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में सालाना आधार पर सिर्फ 1.5% की वृद्धि देखी गई, जो जून 2017 के बाद का सबसे निचला स्तर है। इसका मुख्य कारण खाद्य कीमतों में आई भारी गिरावट है।
सब्ज़ियों की बहार, अन्न का भंडार
रिपोर्ट्स के अनुसार, सब्जियों की कीमतों में आई गिरावट, अनाज के बेहतरीन उत्पादन और पर्याप्त सरकारी भंडार इस राहत के पीछे प्रमुख वजहें हैं। यहां तक कि अगस्त की भारी बारिश के बाद सब्जियों की कीमतों में आई अस्थायी तेजी भी अब थम गई है। अनाज और दालों की कीमतों में भी मासिक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे कुल मिलाकर मुद्रास्फीति पर दबाव कम हुआ है।
आरबीआई का अनुमान भी फेल!
जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए औसत मुद्रास्फीति 1.7% रही, जो खुद आरबीआई के 1.8% के अनुमान से भी कम है। यह दर्शाता है कि हालात उम्मीद से भी बेहतर हैं।
सोना, थोड़ा महंगा, लेकिन असर कम!
हालांकि, सोने की कीमतों में आई जबरदस्त उछाल (सितंबर में सालाना आधार पर लगभग 47% की वृद्धि) ने हेडलाइन सीपीआई को थोड़ा ऊपर रखा है। अकेले सोने ने ही हेडलाइन सीपीआई में करीब 50 आधार अंकों का योगदान दिया है। लेकिन, कुल मिलाकर, आर्थिक परिदृश्य ब्याज दरों में कटौती के लिए अनुकूल दिख रहा है।
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