पर्यावरण के प्रति बड़ी पहल: अब प्लास्टिक नहीं, ‘इको-फ्रेंडली’ अवतार में दिखेगा पान मसाला
देश के खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पान मसाले की पैकेजिंग में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है। अब पान मसाले के लिए इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को हटाकर उसकी जगह कागज, सेल्युलोज और अन्य पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों को लाने की तैयारी है। खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) विनियम, 2018 में संशोधन का यह प्रस्ताव सुरक्षित और टिकाऊ पैकेजिंग की दिशा में एक बड़ी मुहिम का हिस्सा है, जिसमें उद्योग की जरूरतों और तकनीकी व्यवहार्यता का पूरा ध्यान रखा गया है।
पान मसाला भारत में सबसे अधिक खपत वाली वस्तुओं में से एक है। अपनी नई मसौदा अधिसूचना में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पैकेजिंग सामग्री की सूची को व्यापक बनाने का सुझाव दिया है। इसमें अब कागज, पेपरबोर्ड और सेल्युलोज जैसी प्राकृतिक चीजों को शामिल करने की मांग की गई है। नियामक का मानना है कि ये सामग्रियां न केवल खाद्य सुरक्षा के लिए उपयुक्त हैं, बल्कि आधुनिक उद्योग के बदलते स्वरूप को सहारा देने में भी पूरी तरह सक्षम हैं।
खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) संशोधन विनियम, 2026 के मसौदे के तहत, भविष्य की यह पैकेजिंग पूरी तरह ‘प्लास्टिक-मुक्त’ होनी अनिवार्य होगी। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि गुटखा, पान मसाला और तंबाकू के किसी भी स्वरूप को पैक करने के लिए किसी भी स्तर पर प्लास्टिक सामग्री का उपयोग नहीं किया जाएगा। यह कदम तंबाकू उत्पादों से होने वाले कचरे को कम करने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम 2016 के अनुरूप तैयार किए गए इन प्रस्तावों पर अगले 30 दिनों तक हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। मसौदे में यह भी दोहराया गया है कि तंबाकू और पान मसाला रखने, पैक करने या बेचने के लिए इस्तेमाल होने वाले पाउच अब प्लास्टिक सामग्री से नहीं बने होने चाहिए। इस पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि पैकेजिंग की दुनिया में भी एक नया और स्वच्छ बदलाव आएगा।
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