ईस्ट टेक 2025: रांची में आत्मनिर्भरता से संप्रभुता की ओर बढ़ते कदम
रांची के खेलगांव में 19 से 21 सितंबर 2025 तक आयोजित ‘ईस्ट टेक 2025 : आत्मनिर्भरता से संप्रभुता’ संगोष्ठी, भारत को अनुसंधान और विकास (R&D) के क्षेत्र में एक नई दिशा देने का संकल्प लेकर उतरी है। इस महत्वपूर्ण आयोजन के एक सत्र को संबोधित करते हुए, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल आरके आनंद ने देश की सैन्य शक्ति को मजबूत करने और उसे आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनुसंधान की महत्ता पर प्रकाश डाला।
रिसर्च का महत्व: आत्मनिर्भरता से संप्रभुता तक का सफर
जनरल आनंद का मानना है कि भारत को अपनी सैन्य जरूरतों को पूरा करने और आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमें विदेशी वैज्ञानिकों के साथ मिलकर अनुसंधान करने से कतराना नहीं चाहिए, बल्कि उनका सहयोग लेना चाहिए। जिस तरह चीन अनुसंधान के मामले में हमसे काफी आगे है, उसी तरह हमें भी पश्चिमी देशों की तरह R&D में भारी निवेश करने की आवश्यकता है।
सहयोग से संप्रभुता: विदेशी विशेषज्ञता का स्वागत
यह चिंता कि विदेशी सहयोग से तकनीक की चोरी हो सकती है, जनरल आनंद ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने उदाहरण के तौर पर खेल के क्षेत्र का हवाला दिया, जहां हम बेहतर प्रदर्शन के लिए विदेशी कोचों की मदद लेते हैं। उसी तर्ज पर, उन्होंने तर्क दिया कि देश की आत्मनिर्भरता के लिए विदेशी वैज्ञानिकों की विशेषज्ञता का लाभ उठाने में कोई बुराई नहीं है। विशेष रूप से, उन्होंने इज़राइल का उल्लेख किया, जो अपनी किसी भी तकनीक को भारत के साथ साझा करने को तैयार है।
रणनीतिक साझेदारी: प्रतिभा का संगम
जनरल आनंद ने विदेशों में रह रहे भारतीय वैज्ञानिकों को वापस बुलाने और उन्हें देश के अनुसंधान में योगदान देने के लिए प्रेरित करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि योग्य वैज्ञानिकों को उचित वेतनमान और अवसर प्रदान करके हम उनकी प्रतिभा का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। “टैलेंट ब्रिज” और “मिरर लैब्स” जैसी पहलें देश को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
संस्थागत सुधार: डीआरडीओ और इसरो का तुलनात्मक अध्ययन
संगोष्ठी में डीआरडीओ (DRDO) और इसरो (ISRO) के कामकाज का भी तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया। जनरल आनंद ने इसरो की सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री कार्यालय के सीधे हस्तक्षेप और शीर्ष स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता को दिया, जबकि डीआरडीओ की धीमी प्रगति के लिए उन्होंने संस्थागत बाधाओं को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने सुझाव दिया कि सेना की R&D के लिए भी ऐसी ही एक शीर्ष-स्तरीय निगरानी वाली संस्था का गठन आवश्यक है, जिससे निर्णय प्रक्रिया तेज हो और कार्य कुशलता बढ़े।
‘ईस्ट टेक 2025’ जैसे आयोजन भारत को न केवल आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने, बल्कि इसे एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जनरल आरके आनंद के विचारों ने इस दिशा में अनुसंधान, सहयोग और संस्थागत सुधारों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया।
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