आरबीआई का बड़ा फैसला: रेपो दर 5.5% पर स्थिर, जीडीपी अनुमान में उछाल, मुद्रास्फीति में गिरावट
मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 1 अक्टूबर 2025 को अपनी वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति बैठक के नतीजों का ऐलान किया। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में, मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से प्रमुख नीतिगत दर, रेपो दर को 5.5% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है।
क्या हैं मुख्य बातें?
- रेपो दर स्थिर: घरेलू और वैश्विक आर्थिक परिदृश्यों का गहन विश्लेषण करने के बाद, एमपीसी ने रेपो दर को 5.5% पर बनाए रखा है। यह निर्णय वाणिज्यिक बैंकों के लिए केंद्रीय बैंक से अल्पकालिक ऋण लेने की लागत को वर्तमान स्तर पर ही रखेगा।
- तटस्थ मौद्रिक नीति रुख: रेपो दर को यथावत रखने के साथ-साथ, मौद्रिक नीति के रुख को ‘तटस्थ’ बनाए रखा गया है। इसका अर्थ है कि केंद्रीय बैंक भविष्य में आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार ब्याज दरों में समायोजन के लिए लचीलापन बनाए रखेगा।
- खुदरा ऋण पर सीधा असर नहीं: रेपो दर में कोई बदलाव न होने के कारण, आवास, वाहन और अन्य खुदरा ऋणों पर ब्याज दरों में तत्काल कोई बड़ा परिवर्तन होने की संभावना कम है।
- जीडीपी वृद्धि अनुमान में बढ़ोतरी: आरबीआई ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अपने अनुमान को 6.5% से बढ़ाकर 6.8% कर दिया है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
- खुदरा मुद्रास्फीति में गिरावट: इसके विपरीत, चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स) के अनुमान को 3.1% से घटाकर 2.6% कर दिया गया है। यह दर्शाता है कि महंगाई पर नियंत्रण पाने में केंद्रीय बैंक को सफलता मिल रही है।
पिछली समीक्षाओं पर एक नज़र:
यह लगातार दूसरी बार है जब रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे पहले, इस साल फरवरी से जून के बीच, आरबीआई ने रेपो दर में कुल एक प्रतिशत की कटौती की थी। जून 2025 की समीक्षा में 0.5% की कटौती की गई थी, जबकि फरवरी और अप्रैल की समीक्षाओं में 0.25-0.25% की कटौती की गई थी।
यह मौद्रिक नीति निर्णय भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जहाँ विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ महंगाई को नियंत्रित करने पर भी जोर दिया गया है।
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