भारतीय रुपया: वैश्विक उथल-पुथल के बीच मजबूती का दम
घरेलू शेयर बाजारों में छाई तेजी के बीच, भारतीय रुपया बुधवार को शुरुआती कारोबार में दो पैसे की बढ़त के साथ 88.75 प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रहा है। यह मामूली उछाल, वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच भी, भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत देता है।
भू-राजनीतिक तनावों का प्रभाव और रुपये की चाल
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं का प्रभाव रुपये पर बना हुआ है, जिसके चलते यह एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 88.76 पर खुला और फिर 88.75 प्रति डॉलर तक पहुँच गया, जो पिछले बंद भाव की तुलना में दो पैसे की बढ़त दर्शाता है। यह उल्लेखनीय है कि मंगलवार को रुपया तीन पैसे की गिरावट के साथ 88.77 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
डॉलर सूचकांक में वृद्धि और शेयर बाजारों में तेजी
इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.28 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98.85 पर आ गया है। हालांकि, घरेलू शेयर बाजारों में उत्साह का माहौल है। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 254.02 अंक चढ़कर 82,180.77 अंक पर पहुँच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 70.25 अंक की बढ़त के साथ 25,178.55 अंक पर कारोबार कर रहा है।
ब्रेंट क्रूड और विदेशी निवेश का योगदान
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, ब्रेंट क्रूड 0.75 प्रतिशत की बढ़त के साथ 65.94 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर रहा, जो वैश्विक तेल बाजार में थोड़ी नरमी का संकेत दे रहा है। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को भारतीय बाजार में जोरदार खरीदारी की, जिससे 1,440.66 करोड़ रुपये के शुद्ध निवेश के साथ बाजार को अतिरिक्त मजबूती मिली।
कुल मिलाकर, भारतीय रुपया भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद, शेयर बाजारों में मजबूती और विदेशी संस्थागत निवेशकों के बढ़ते विश्वास के कारण अपनी स्थिति बनाए रखने में सफल रहा है। यह संकेत देता है कि निवेशक भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य को लेकर सकारात्मक हैं।
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