सोलेक्स एनर्जी का भविष्य: 2030 तक 1.5 अरब डॉलर का सौर महा-निवेश!
नई दिल्ली: सौर ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए तैयार सोलेक्स एनर्जी ने 2030 तक अपनी मॉड्यूल और सेल निर्माण क्षमताओं को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाने के लिए कमर कस ली है। कंपनी 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 13,500 करोड़ रुपये) के भारी निवेश की योजना बना रही है, जो भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
कंपनी के दूरदर्शी चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) चेतन शाह ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में एक विशेष बातचीत के दौरान इस महत्वाकांक्षी योजना का खुलासा किया। शाह के अनुसार, इस विशाल निवेश से सोलेक्स एनर्जी की मॉड्यूल निर्माण क्षमता 10 गीगावाट (जीडब्ल्यू) के शिखर पर पहुंच जाएगी।
यह निवेश गुजरात को सौर ऊर्जा के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कंपनी वहां 10 गीगावाट सेल निर्माण क्षमता के साथ-साथ दो गीगावाट इंगोट और वेफर उत्पादन की अत्याधुनिक सुविधाएं स्थापित करेगी। सीएमडी ने इस बात पर जोर दिया कि आगामी संयंत्र न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाएंगे, बल्कि उन्नत और उच्च-प्रदर्शन वाले नवीकरणीय उत्पादों के निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित करेंगे।
इस महत्वपूर्ण विस्तार के लिए, सोलेक्स एनर्जी ने जर्मनी की प्रतिष्ठित आईएससी कोंस्टांज के साथ एक रणनीतिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी तकनीकी नवाचार और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को भारत में लाने में मदद करेगी।
जहां तक मौजूदा वित्तीय वर्ष के पूंजीगत व्यय का सवाल है, शाह ने सूचित किया कि सोलेक्स एनर्जी चालू वित्त वर्ष में मॉड्यूल क्षमताओं के विस्तार के लिए 400 करोड़ रुपये और सेल क्षमताओं को बढ़ाने के लिए 600 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। यह स्पष्ट करता है कि कंपनी अपनी दीर्घकालिक योजनाओं को साकार करने के लिए आज से ही सक्रिय कदम उठा रही है।
सोलेक्स एनर्जी का यह महा-निवेश न केवल कंपनी के विकास को गति देगा, बल्कि भारत को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और सतत भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।
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