बिहार का औद्योगिक गौरव: कांग्रेस की दूरदर्शिता बनाम वर्तमान की हकीकत
आज़ादी के बाद, जब भारत नव-निर्माण की राह पर अग्रसर था, तब अविभाजित बिहार भी औद्योगिक विकास की एक सुनहरी गाथा लिख रहा था। कांग्रेस की सरकारों के कार्यकाल में, बिहार न केवल देश के नक्शे पर एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरा, बल्कि विकास के पहिये भी पुरज़ोर गति से घूम रहे थे। भारी उद्योग, ऊर्जा, डेयरी और रेल उत्पादन जैसे क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति हुई, जिसने राज्य को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाया।
उस दौर में कांग्रेस ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए ऐसी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की, जो आज भी बिहार की औद्योगिक रीढ़ हैं। बरौनी तेल शोधन कारखाना, सिंदरी और बरौनी खाद कारखाना, बरौनी डेयरी, रेल पहिया कारखाना (बेला), डीज़ल लोकोमोटिव कारखाना (मढ़ौरा), नवीनगर थर्मल परियोजना और सुधा कोऑपरेटिव डेयरी नेटवर्क जैसी प्रमुख परियोजनाएं उस समय की कांग्रेस सरकारों की देन हैं। इन उद्योगों ने न केवल रोज़गार के अवसर पैदा किए, बल्कि बिहार के उत्पादों को राष्ट्रीय बाज़ार में एक विशिष्ट पहचान दिलाई।
वहीं, आज की हकीकत चौंकाने वाली है। जहाँ एक ओर कांग्रेस ने बिहार की औद्योगिक बुनियाद को मज़बूती से रखा, वहीं बीजेपी-जेडीयू की सरकारों पर कोई भी महत्वपूर्ण उद्योग स्थापित न करने का आरोप है। इतना ही नहीं, यह भी दावा किया जाता है कि उनकी नीतियां इतनी अव्यवस्थित और भ्रष्ट रहीं कि जो मौजूदा उद्योग थे, वे भी चौपट हो गए। यह तुलना बिहार के औद्योगिक परिदृश्य पर एक गहरी छाप छोड़ती है, जो कांग्रेस के स्वर्णिम औद्योगिक युग और वर्तमान की स्थिति के बीच एक स्पष्ट अंतर दर्शाती है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


