बिहार चुनाव 2025: एनडीए की प्रचंड जीत, महागठबंधन के उड़े होश, नीतीश और चिराग का जलवा बरकरार!
पटना: बिहार की सत्ता का मिजाज एक बार फिर पूरी तरह से बदल गया है! 2025 के विधानसभा चुनाव नतीजों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। शुरुआती 11 घंटों की रोमांचक गिनती के बाद, एनडीए ने ऐसा दबदबा बनाया है कि विपक्षी खेमे में मायूसी छा गई है। ताजा जानकारी के अनुसार, एनडीए गठबंधन 200 से अधिक सीटों पर आगे बढ़कर भारी जीत की ओर बढ़ रहा है।
एनडीए का तूफानी प्रदर्शन:
भले ही चुनाव नतीजों की अंतिम तस्वीर आने में कुछ घंटे बाकी हों, लेकिन शुरुआती रुझान एनडीए के लिए एकतरफा जीत का संकेत दे रहे हैं। भाजपा 90 से अधिक सीटों पर जोरदार बढ़त बनाए हुए है, वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जेडीयू भी 80 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रही है।
चिराग पासवान का ‘किंगमेकर’ अवतार:
इस बार के चुनाव में चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) एक बार फिर ‘किंगमेकर’ के रूप में उभरी है। लगभग 20 सीटों पर बढ़त के साथ, एलजेपी (आरवी) एनडीए के सामाजिक समीकरण को और भी मजबूत करती दिख रही है। आलोचकों को करारा जवाब देते हुए, चिराग ने साबित कर दिया है कि पासवान वोट बैंक आज भी बिहार की राजनीति में निर्णायक है।
महागठबंधन का बिखराव:
दूसरी ओर, महागठबंधन पूरी तरह से बिखरता हुआ नजर आ रहा है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) केवल 20 के आसपास सीटों पर ही आगे बढ़ पा रही है, जबकि कांग्रेस की स्थिति तो और भी चिंताजनक है। कांग्रेस महज़ कुछ सीटों पर बढ़त हासिल कर सकी है, जो पार्टी की लंबे समय से जारी गिरावट को साफ तौर पर दर्शाता है। 2020 में भी सीट बंटवारे का फायदा मिलने के बावजूद कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था, और इस बार तो स्थिति और भी बदतर हो गई है।
नीतीश कुमार की ‘अटल’ पकड़:
इन नतीजों के बीच, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक पैठ एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार की पकड़ इसलिए मजबूत बनी हुई है क्योंकि उन्होंने वर्षों से अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी), महादलित और गैर-यादव ओबीसी समुदायों के बीच गहरा विश्वास कायम किया है। महिलाओं के बीच उनकी कल्याणकारी योजनाओं का सीधा असर भी उनके अटूट सामाजिक आधार का प्रमाण है। यह देखना दिलचस्प है कि पिछले तीन विधानसभा चुनावों में जेडीयू की सीटों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, सत्ता की चाबी हमेशा नीतीश कुमार के हाथों में ही रही है, और इस बार भी वही पैटर्न दोहराया जा रहा है।
कांग्रेस की डूबती नैया:
कांग्रेस की प्रतिक्रिया भी इन नतीजों के बाद सवालों के घेरे में है। पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भले ही चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हों, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस की असली समस्या उसके संगठन, जमीनी पकड़ और नेतृत्व की सक्रियता में है। बिहार में कांग्रेस का कोई मजबूत बूथ ढांचा नहीं है और पिछले कई चुनावों से उसका जनाधार लगातार खिसकता जा रहा है।
नया बिहार, नई दिशा:
कुल मिलाकर, बिहार चुनाव 2025 के नतीजे एक बड़े राजनीतिक परिवर्तन का संकेत दे रहे हैं। एनडीए की प्रचंड जीत, जेडीयू और एलजेपी (आरवी) की मजबूत उपस्थिति, और महागठबंधन की भारी गिरावट ने सूबे की राजनीति को एक नई दिशा दी है। अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री पद और सरकार की संरचना पर टिकी हैं, जिसका अंतिम फैसला आने वाले कुछ घंटों में स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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