
“हमारे पास वीडियो देखने का वक्त नहीं”: सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई CJP की तत्काल सुनवाई की मांग
CJI on CJP plea: जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई कथित पुलिसिया कार्रवाई का मामला अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है, लेकिन वहां से याचिकाकर्ताओं को मायूसी हाथ लगी है। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले पर तत्काल सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया। मामले का उल्लेख किए जाने पर CJI का रुख काफी सख्त नजर आया। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा, “हमें वीडियो देखने में कोई दिलचस्पी नहीं है, हमारे पास इसके लिए समय नहीं है। न अपना वक्त जाया करें और न हमारा।”
याचिका में क्या थी दलील?
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से इस मामले में स्वत: संज्ञान लेने की पुरजोर अपील की थी। दलील दी गई कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठा रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया है। वकील ने अदालत को बताया कि ये छात्र NEET-UG 2026 पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली की खामियों और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में बुनियादी सुधार की जायज मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे हैं।
CJI ने वीडियो के जिक्र पर ही रोका
सुनवाई के दौरान जैसे ही याचिकाकर्ता के वकील ने पुलिस कार्रवाई के सबूत के तौर पर वीडियो का हवाला देना चाहा, CJI सूर्यकांत ने उन्हें बीच में ही टोक दिया। उन्होंने कड़े लहजे में कहा, “शुक्रिया, लेकिन हमारे पास ये वीडियो देखने का वक्त नहीं है और न ही हम इन्हें देखना चाहते हैं।” इस टिप्पणी के साथ ही अदालत ने मामले की अर्जेंट हियरिंग की मांग को सिरे से खारिज कर दिया।
33 दिनों से जारी है छात्रों का संघर्ष
बता दें कि CJP पिछले एक महीने से अधिक समय से जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ आंदोलन कर रही है। संगठन की स्पष्ट मांग है कि NEET-UG पेपर लीक की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें। इसी आंदोलन के तहत 20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च का आह्वान किया गया था, जिसके दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच भारी टकराव हुआ और कई लोगों को हिरासत में लिया गया था।
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हाईकोर्ट से भी नहीं मिली थी तुरंत राहत
सुप्रीम कोर्ट से पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस मसले पर तत्काल सुनवाई से पल्ला झाड़ लिया था। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि अदालत को इस तरह के विवादों में नहीं घसीटा जाना चाहिए। हालांकि, बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट मामले की सुनवाई के लिए राजी हो गया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा रुख ने CJP और प्रदर्शनकारी छात्रों की कानूनी उम्मीदों को फिलहाल बड़ा झटका दिया है।
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