बिहार विधानसभा का नया चेहरा: 17 निष्ठाएँ बदलीं, 99 विधेयक बने कानून

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बिहार विधानसभा का नया चेहरा: 17 निष्ठाएँ बदलीं, 99 विधेयक बने कानून
पटना विधानसभा.

बिहार की राजनीति में उथल-पुथल: 5 सालों में 17 विधायकों ने बदली पार्टी, 99 विधेयक हुए पारित

पटना: बिहार की राजनीति में नेताओं का पाला बदलना कोई नई बात नहीं है, लेकिन बीच सत्र में ही पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में चले जाना भी एक आम चलन बन गया है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और बिहार इलेक्शन वॉच द्वारा जारी एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, बिहार विधानसभा के पिछले पांच साल के कार्यकाल (2020-2025) के दौरान 17 विधायकों ने अपनी पार्टी बदली। इस दौरान, विधानसभा में कुल 99 विधेयक पेश किए गए, जिनमें से सभी पारित हो गए।

दलबदल का सिलसिला जारी: 17 विधायकों ने बदले पाले

रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बिहार के कुल 243 विधायकों में से 17 ने अपना दल बदला। इन विधायकों की सूची और उनके पाला बदलने की जानकारी नीचे दी गई है:

146 बैठकें, 22,505 प्रश्न: विधानसभा की सक्रियता

रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 2025 के दौरान बिहार विधानसभा के कुल 15 सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 146 बैठकें हुईं। इस अवधि में, 243 विधायकों ने कुल 22,505 प्रश्न पूछे। इन प्रश्नों का मुख्य जोर ग्रामीण कार्य, शिक्षा, स्वास्थ्य और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर रहा।

जनता की आवाज: किसने पूछे सबसे ज्यादा सवाल?

सबसे अधिक प्रश्न पूछने वाले विधायकों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अरुण शंकर प्रसाद 275 सवालों के साथ शीर्ष पर रहे। इसके बाद कांग्रेस के मनोज प्रसाद सिंह (231 प्रश्न) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मुकेश कुमार यादव (230 प्रश्न) रहे। पार्टी के आधार पर देखें तो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) लिबरेशन के विधायकों ने सर्वाधिक सक्रियता दिखाई। सत्तारूढ़ दल जदयू और भाजपा के विधायकों ने भी प्रश्नों की एक उल्लेखनीय संख्या दर्ज की।

ग्रामीण कार्य, शिक्षा और स्वास्थ्य: जनता की प्रमुख चिंताएं

‘बिहार इलेक्शन वॉच’ के राजीव कुमार ने बताया कि सबसे ज्यादा 3,000 से अधिक प्रश्न ग्रामीण कार्य, शिक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दों पर पूछे गए, जो सीधे तौर पर जनता की प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं। 2021 से 2025 के बीच पारित हुए प्रमुख विधेयकों में बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक 2021, बिहार नियंत्रण अपराध विधेयक 2024, और जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय विधेयक 2025 शामिल हैं।

पारदर्शिता में सुधार, पर कुछ कमियां बाकी

राजीव कुमार ने कहा कि बिहार विधानसभा की पारदर्शिता में सुधार हुआ है और सत्रों की नियमितता बनी रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि कई मंत्रियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति का डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया।

चुनाव का बिगुल बजा: 6 और 11 नवंबर को वोटिंग

एडीआर की यह रिपोर्ट बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले जारी हुई है। बिहार में 6 नवंबर और 11 नवंबर को दो चरणों में मतदान होगा, जबकि 14 नवंबर को सभी 243 सीटों के लिए मतगणना की जाएगी।


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