बिहार का चुनावी रण: युवा जोश, अनुभव का संगम और अनोखे चेहरे!
बिहार, 2025: बिहार की राजनीति का कैनवास इस बार पहले से कहीं ज्यादा जीवंत और अप्रत्याशित हो गया है। सामाजिक पहचान या सिर्फ नाम पर आधारित समीकरणों से परे, यह चुनाव युवाओं की ऊर्जा, अनुभवी नेताओं की परिपक्वता, शिक्षित चेहरों और ज़मीनी हकीकत से जुड़े लोगों का एक अनूठा मिश्रण पेश कर रहा है। अमीर और साधारण, सभी पृष्ठभूमि के उम्मीदवार इस बार के मुकाबले को और भी रोमांचक बना रहे हैं।
युवा शक्ति का उदय: 25 साल की मैथिली ठाकुर मैदान में!
पहले चरण के उम्मीदवारों की सूची में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने खास तौर पर युवा मतदाताओं को लुभाने की रणनीति अपनाई है। जेन जी (Generation Z) को मौका देते हुए, अलीनगर से 25 वर्षीय युवा चेहरा, मैथिली ठाकुर भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरी हैं। यदि वह जीत दर्ज करती हैं, तो विधानसभा में युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व और भी मुखरता से दिखाई देगा।
अनुभव का बोलबाला: 79 वर्षीय जदयू उम्मीदवार सबसे उम्रदराज
वहीं, हरनौत से जनता दल (यूनाइटेड) (जदयू) के 79 वर्षीय हरिनारायण सिंह सबसे उम्रदराज उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। जदयू ने इस बार कुल मिलाकर 70 पार के अनुभवी नेताओं पर भी भरोसा जताया है।
शिक्षा का संगम: दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट से लेकर कम पढ़े-लिखे उम्मीदवार तक
शैक्षिक योग्यता के मोर्चे पर भी यह चुनाव विविधता दिखा रहा है। मैथिली ठाकुर जहां दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं, वहीं 28 वर्षीय संदेश से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार दीपू सिंह भी इसी प्रतिष्ठित संस्थान से स्नातक हैं।
एकमा, मनेर और मसौढ़ी में अनोखे मुकाबले
दूसरी ओर, एकमा, मनेर और मसौढ़ी जैसे निर्वाचन क्षेत्रों में कम पढ़े-लिखे उम्मीदवार भी मुकाबले में हैं। लखीसराय में, उप-मुख्यमंत्री और इंजीनियर विजय कुमार सिन्हा को उन्हीं की जाति के सातवीं पास कांग्रेस उम्मीदवार अमेश कुमार कड़ी टक्कर दे रहे हैं। संपत्ति के मामले में भी इन दोनों के बीच ज़मीन-आसमान का अंतर देखने को मिल रहा है।
अरबपति से लेकर साधारण तक: संपत्ति का अनोखा खेल
बरबीघा से जदयू के कुमार पुष्पंजय 72 करोड़ की संपत्ति के साथ पहले चरण के सबसे अमीर उम्मीदवार हैं। इसके विपरीत, हायाघाट से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के श्याम भारती मात्र 38 हजार के मालिक हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि सूर्यगढ़ा में, दोनों गठबंधन के उम्मीदवार आठवीं पास होने के बावजूद करोड़पति हैं!
अवेयर मीडिया नेटवर्क
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जातिगत समीकरण और आरक्षित सीटों पर भी अमीर उम्मीदवारों का दबदबा
जातिगत समीकरणों की बात करें तो यादव, ब्राह्मण, कुर्मी, पासवान और राजपूत समुदाय के उम्मीदवार लगभग हर प्रमुख सीट पर अपनी उपस्थिति बनाए हुए हैं। आरक्षित सीटों पर भी संपन्न उम्मीदवारों का दबदबा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। खगड़िया में, जदयू के बबलू सिर्फ साक्षर हैं, जबकि उन्हें कांग्रेस के करोड़पति और पीएचडीधारी उम्मीदवार चंदन कुमार से चुनौती मिल रही है।
यह बिहार का चुनाव वास्तव में विविधताओं का एक अनूठा संगम है, जहां युवा शक्ति, अनुभव, शिक्षा के विभिन्न स्तर और आर्थिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवार मिलकर एक रोमांचक चुनावी परिदृश्य का निर्माण कर रहे हैं।
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