दिल्ली की हवा फिर हुई ‘जहरीली’, दिवाली से पहले प्रदूषण का बढ़ता खतरा
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की हवा शुक्रवार को लगातार चौथे दिन ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई। दिवाली के त्योहार के करीब आते ही प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे शहरवासियों की चिंताएं बढ़ने लगी हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, शाम 4 बजे शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 254 पर पहुंच गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में ही बना हुआ है। आसमान में छाई धुंध की मोटी चादर ने प्रमुख इलाकों में दृश्यता को काफी कम कर दिया है।
वज़ीराबाद में AQI 323 पार, ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंचा
शनिवार सुबह के आंकड़ों के अनुसार, वज़ीराबाद में वायु गुणवत्ता 323 दर्ज की गई, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं, जहांगीरपुरी का AQI 248, बुराड़ी का 218, पंजाबी बाग का 212, सत्यवती कॉलेज का 213, सोनिया विहार का 198, मुंडका का 197, आरके पुरम का 195, नरेला का 194, आईटीओ का 192 और अलीपुर का 187 रहा।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया कि शुक्रवार को न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री कम, 18.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस रहा। सापेक्ष आर्द्रता 74 प्रतिशत थी।
पड़ोसी इलाकों में भी वायु गुणवत्ता चिंताजनक
दिल्ली से सटे गाजियाबाद के लोनी में AQI 293, संजय नगर में 284, इंदिरापुरम में 226 और वसुंधरा में 219 दर्ज किया गया। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क का AQI 214, नोएडा के सेक्टर 116 का 213 और सेक्टर 124 का 193 रहा। गुरुग्राम के सेक्टर 51 और ग्वाल पहाड़ी में AQI क्रमशः 185 और 167 रहा।
CPCB के मानकों के अनुसार, 0-50 AQI ‘अच्छा’, 51-100 ‘संतोषजनक’, 101-200 ‘मध्यम’, 201-300 ‘खराब’, 301-400 ‘बहुत खराब’ और 401-500 ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।
दिल्ली-एनसीआर में GRAP चरण-1 लागू, कदम उठाने के निर्देश
बढ़ते प्रदूषण स्तर को देखते हुए, दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का चरण-1 लागू कर दिया गया है। CAQM उप-समिति ने 27-सूत्रीय कार्य योजना को सक्रिय करते हुए सभी एजेंसियों को AQI को और बिगड़ने से रोकने के लिए सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी, बरतें सावधानी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बढ़ते कण पदार्थ (पार्टिकुलेट मैटर) से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों की कड़ी चेतावनी दी है। पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शरद जोशी ने बताया कि फसल जलाना, वाहनों का धुआं और आतिशबाजी जैसे स्रोत प्रदूषण बढ़ा रहे हैं, जिससे सीओपीडी, अस्थमा और तपेदिक जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों में श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। खांसी, बुखार, सांस फूलना और सीने में दर्द जैसे लक्षण आम हो रहे हैं। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले बच्चों और बुजुर्गों को भी खतरा है।
डॉ. जोशी ने ‘ग्रीन पटाखों’ के इस्तेमाल से भी पूरी तरह से हानिरहित न होने की बात कही और वाहनों से निकलने वाले धुएं के साल भर के प्रदूषण पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए कारपूलिंग, वाहनों के उत्सर्जन नियंत्रण, घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का उपयोग, उचित रसोई वेंटिलेशन, धूपबत्ती जैसे प्रदूषण स्रोतों से बचाव और श्वसन संबंधी समस्याओं वाले लोगों को नियमित दवा लेने की सलाह दी। इसके अतिरिक्त, बाहरी गतिविधियों के दौरान N95 या डबल सर्जिकल मास्क पहनने की भी सलाह दी गई है।
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