धार्मिक बहिष्कार का फरमान? राकांपा विधायक पर अजित पवार का कड़ा एक्शन, जारी किया नोटिस
महाराष्ट्र में राजनीतिक पारा गरमाया हुआ है, और इस बार वजह बनी है राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के विधायक संग्राम जगताप का विवादास्पद बयान। हिंदुओं से केवल हिंदुओं की दुकानों से ही खरीदारी करने की अपील करने वाले जगताप को अब पार्टी प्रमुख और उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने आड़े हाथों लिया है। पवार ने न सिर्फ जगताप के बयान को राकांपा की विचारधारा के खिलाफ बताया, बल्कि उनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया है।
विचारधारा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं:
अजित पवार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी नेता, चाहे वह राष्ट्रीय पार्टी का हो या स्थानीय, अगर पार्टी की मूल विचारधारा के विपरीत बोलता है, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जगताप का बयान पार्टी की समावेशी नीति के विरुद्ध है, और इसी कारण उन्हें नोटिस भेजा गया है। इस नोटिस पर जगताप के जवाब के बाद ही पार्टी आगे की कार्रवाई तय करेगी।
राजनीतिक विवाद की जड़:
यह पूरा मामला विधायक जगताप द्वारा हाल ही में एक सार्वजनिक मंच पर दिए गए बयान के बाद सामने आया। उन्होंने दिवाली के अवसर पर हिंदुओं से केवल ‘हिंदू व्यापारियों’ से ही सामान खरीदने की सलाह दी थी। इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया है।
शरदचंद्र पवार गुट का वार:
जहां एक ओर अजित पवार ने अपने विधायक पर कार्रवाई की है, वहीं दूसरी ओर शरदचंद्र पवार के नेतृत्व वाली राकांपा के विधायक शशिकांत शिंदे ने राज्य सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। शिंदे ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल चुनावों को ध्यान में रखते हुए सांप्रदायिक और जातिगत राजनीति को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में ऐसे विभाजन की राजनीति का कोई स्थान नहीं है और इस तरह के बयानों का विरोध होना चाहिए। शिंदे ने सरकार पर एक विशेष समुदाय को निशाना बनाकर माहौल बनाने का भी आरोप लगाया।
आगे क्या?
संग्राम जगताप के जवाब का इंतजार है, जिसके बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस राजनीतिक विवाद का अंतिम परिणाम क्या होगा और राकांपा के भीतर इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया जाता है।
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