बिहार की धड़कन: शाहाबाद की भाषा और एक महान कलाकार की पुकार
बिहार की राजनीति में एक नई लहर दौड़ रही है, जो आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र शाहाबाद क्षेत्र की सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी दो महत्वपूर्ण मांगों को आवाज़ दे रही है। भोजपुरी को राजकीय भाषा का दर्जा मिले और लोककला के पुरोधा भिखारी ठाकुर को मरणोपरांत भारत रत्न से नवाज़ा जाए – ये वो मांगें हैं जो अब हवा में तैर रही हैं और जनमानस को अपनी ओर खींच रही हैं।
भोजपुरी, महज़ एक भाषा नहीं, बल्कि बिहार के लाखों-करोड़ों लोगों की धड़कन है। इसका प्रभाव भोजपुर, रोहतास, कैमूर, बक्सर, सारण, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सीवान और जहानाबाद जैसे विशाल भूभाग में फैला हुआ है। विशेष रूप से, शाहाबाद क्षेत्र, जिसमें भोजपुर, बक्सर, रोहतास और कैमूर जिले शामिल हैं, इस भाषा का केंद्र बिंदु रहा है। इसी क्षेत्र से उठी ये मांगें, भोजपुरी के बढ़ते साहित्यिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करती हैं, और यह बताती हैं कि कैसे एक भाषा अपनी जड़ों को मजबूत करते हुए एक क्षेत्र की पहचान बन जाती है।
इस पृष्ठभूमि में, लोक कलाकार भिखारी ठाकुर का नाम भी बेहद अहम् हो जाता है। उनके द्वारा भोजपुरी लोककला को दी गई अमूल्य सेवाओं के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की मांग, उनके सांस्कृतिक योगदान का एक स्वाभाविक प्रतिफल है। यह मांग सिर्फ एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि भोजपुरी कला और संस्कृति के प्रति देश के सम्मान का प्रतीक है।
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