गणतंत्र दिवस 2026: इस बार पटना के गांधी मैदान में गणतंत्र दिवस का नजारा सिर्फ परेड और झांकियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सामाजिक क्रांति की एक नई इबारत लिखेगा। पुनपुन के महादलित समुदाय की छह बेटियां जब पिंक बस की स्टेयरिंग थामकर परिवहन विभाग की झांकी का नेतृत्व करेंगी, तो वह पल पूरे देश के लिए महिला सशक्तिकरण की एक जीवंत मिसाल होगा।
यह महज एक परेड का हिस्सा नहीं, बल्कि उन रूढ़ियों को चकनाचूर करने की हुंकार है, जिनमें अक्सर गरीब और वंचित परिवारों की बेटियों को जकड़ कर रखा जाता है।
गांधी मैदान में ‘हौसले की उड़ान’
समारोह के दौरान जब परिवहन विभाग की झांकी गांधी मैदान में प्रवेश करेगी, तो आकर्षण का केंद्र होंगी वे ‘पिंक बसें’, जिनकी ड्राइवर और कंडक्टर दोनों ही महिलाएं होंगी।
अवेयर मीडिया नेटवर्क
ये सभी बेटियां पुनपुन के उन परिवारों से आती हैं, जहां अभावों का साया रहा है। समाज के दबाव और मुश्किल हालात के बावजूद, इन बेटियों ने अपने लिए एक नया रास्ता चुना। सरकार की ‘गर्ल ऑन व्हील्स’ पहल अब पूरे राज्य में बदलाव का संदेश फैलाएगी।
बाल विवाह की बेड़ियों से ड्राइविंग सीट तक
इन बेटियों के लिए यह सफर कांटों भरा था। कभी बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाने वाली ये जांबाज लड़कियां आज हैवी मोटर व्हीकल (HMV) चलाने का लाइसेंस लेकर मैदान में उतरने को तैयार हैं। महिला एवं बाल विकास निगम ने पहले 16 लड़कियों को लाइट मोटर व्हीकल की ट्रेनिंग दी थी।
इसके बाद, महादलित विकास मिशन के तहत छह चुनिंदा बेटियों को औरंगाबाद स्थित ड्राइविंग इंस्टीट्यूट में भारी वाहन चलाने का कड़ा प्रशिक्षण दिलाया गया। ट्रेनिंग पूरी कर अब ये बेटियां लाइसेंस के साथ आत्मविश्वास से लबरेज हैं।
खेतों की ‘पीली क्रांति’ भी बिखेरेगी अपनी चमक
समारोह में कृषि विभाग की झांकी भी एक महत्वपूर्ण संदेश लेकर आएगी। इस साल झांकी के जरिए दलहन और तेलहनी फसलों से आने वाली समृद्धि को प्रदर्शित किया जाएगा। केंद्र के निर्देशों का पालन करते हुए बिहार अब तेलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है।
राज्य ने 2.371 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में तेलहनी फसलों की खेती का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। अब पारंपरिक राई-सरसों के साथ-साथ तिल, तीसी, मूंगफली, सूर्यमुखी और सोयाबीन जैसी फसलों को बढ़ावा देकर किसानों की तकदीर बदली जा रही है।
तैयारियों का अंतिम दौर, गूंजेगी परेड की धमक
गणतंत्र दिवस की गरिमा को देखते हुए गांधी मैदान में तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं। मैदान में चल रहे सरस और कश्मीरी मेला संचालकों को 10 जनवरी तक जगह खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है। 11 जनवरी से परेड की रिहर्सल का आगाज़ होगा। मैदान के समतलीकरण और स्वच्छता के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
पिंक बस चलाती ये बेटियां इस बार साबित कर देंगी कि बदलता हुआ बिहार अब बेटियों को ‘बोझ’ नहीं, बल्कि ‘बदलाव का सारथी’ मानता है।
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