गडचिरोली ब्लास्ट: 15 जवानों की शहादत और नक्सली कनेक्शन के आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत, जानें किन शर्तों पर मिली राहत
सुप्रीम कोर्ट ने 2019 के भयावह गढ़चिरोली बम विस्फोट मामले में आरोपी कैलाश रामचंदानी को बड़ी राहत देते हुए जमानत दे दी है। रामचंदानी पर आरोप है कि उसने अपनी दुकान से तार और अन्य विस्फोटक उपकरण उन माओवादियों को मुहैया कराए थे, जिन्होंने इस विस्फोट को अंजाम दिया। इस दर्दनाक हमले में 15 पुलिसकर्मी और एक नागरिक की जान चली गई थी। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी की कि हालांकि रामचंदानी के खिलाफ आरोप गंभीर प्रतीत हो सकते हैं, लेकिन वह कोई कुख्यात अपराधी नहीं है और न ही उसका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड है, जो मुकदमे की प्रक्रिया को बाधित कर सके।
अदालत ने अपने फैसले में इस बात को प्रमुखता दी कि मुकदमे की वर्तमान स्थिति को देखते हुए इसके जल्द पूरा होने की संभावना कम है, क्योंकि अभियोजन पक्ष अभी भी 200 से अधिक गवाहों से पूछताछ करना चाहता है। ऐसे में मुकदमे के निष्कर्ष तक पहुँचने में लंबा वक्त लग सकता है। रामचंदानी को जमानत देते हुए शीर्ष अदालत ने छह कड़ी शर्तें भी लागू की हैं। उसे आदेश दिया गया है कि वह गडचिरोली स्थित अपने पैतृक निवास से बाहर नहीं निकलेगा, केवल बॉम्बे की निचली अदालत में पेशी के लिए ही उसे बाहर जाने की अनुमति होगी। इसके अलावा, उसे हर हफ्ते स्थानीय पुलिस स्टेशन में हाजिरी देनी होगी और अपना सक्रिय मोबाइल नंबर अधिकारियों को उपलब्ध कराना होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी या उसके वकील मुकदमे की कार्यवाही में किसी भी तरह की देरी या स्थगन का प्रयास नहीं करेंगे।
अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि जमानत की अवधि के दौरान आरोपी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी सह-आरोपी के संपर्क में नहीं आएगा। यदि इस शर्त का उल्लंघन होता है, तो प्रशासन को उसकी जमानत तुरंत रद्द करने का अधिकार होगा। गौरतलब है कि शुरुआत में अदालत ने रामचंदानी को अंतरिम राहत दी थी और सुनवाई मार्च के अंत में तय की थी, लेकिन मामले के त्वरित निपटारे के लिए अब इसे नियमित जमानत में बदल दिया गया है। रामचंदानी को 29 जून, 2019 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आईपीसी की धारा 302 और 353 के साथ-साथ शस्त्र अधिनियम, विस्फोटक अधिनियम, महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) जैसी गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज है।
सुनवाई के दौरान, महाराष्ट्र सरकार और एनआईए (NIA) का पक्ष रखते हुए सहायक सरकारी वकील ऐश्वर्या भाटी ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि रामचंदानी ने न केवल हमलावरों को आईईडी (IED) विस्फोट के निर्देश दिए थे, बल्कि वह सीधे तौर पर नक्सलियों को वॉकी-टॉकी और अन्य साजो-सामान की सप्लाई करने में भी शामिल था। भाटी ने कोर्ट को बताया कि आरोपी वन क्षेत्रों में जाकर उन माओवादियों से भी मिला था, जिन पर 2019 के इस घातक विस्फोट की साजिश रचने का आरोप है।
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