‘स्वच्छ’ इंदौर में प्यास बनी आफत: दूषित पानी के सेवन से 32 अस्पताल में भर्ती, तीन की मौत का दावा
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां के भागीरथपुरा क्षेत्र में कथित तौर पर दूषित पानी पीने के कारण 30 से अधिक लोग बीमार पड़ गए हैं। क्षेत्रीय पार्षद के अनुसार, बीमारों में शामिल एक 80 वर्षीय बुजुर्ग की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने बताया कि भागीरथपुरा क्षेत्र के कम से कम 32 लोग फिलहाल विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। मरीजों की शिकायत है कि दूषित जल के सेवन के बाद उन्हें लगातार उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) जैसी गंभीर समस्याएं होने लगीं।
सैंपल रिपोर्ट का इंतजार, प्रशासन अलर्ट
डॉ. हासानी के मुताबिक, क्षेत्र से पेयजल के नमूने जांच के लिए भेज दिए गए हैं, जिनकी रिपोर्ट अगले 48 घंटों में मिलने की उम्मीद है। इस बीच, प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी पीड़ितों को तत्काल और बेहतर गुणवत्ता वाला उपचार उपलब्ध कराया जाए।
नर्मदा के पानी पर उठ रहे सवाल
भागीरथपुरा के निवासियों का सीधा आरोप है कि नगर निगम द्वारा नलों के जरिए आपूर्ति किया जाने वाला नर्मदा का पानी पीने से वे बीमार हुए हैं। क्षेत्रीय पार्षद कमल बाघेला ने कहा, “स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले गुरुवार (25 दिसंबर) को सप्लाई किए गए पानी से अजीब सी गंध आ रही थी। अंदेशा है कि इसी के सेवन से लोग बीमार हुए हैं, हालांकि असली वजह रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।”
मौत के दावों पर छिड़ी बहस
दूषित पानी से होने वाली मौतों को लेकर प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच विरोधाभास बना हुआ है। पार्षद बाघेला ने एक निजी अस्पताल में भर्ती 80 वर्षीय नंदलाल पाल की मृत्यु की पुष्टि की है। उनके बेटे सिद्धार्थ ने बताया कि उनके पिता को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद 28 दिसंबर को भर्ती कराया गया था, जिन्होंने मंगलवार सुबह दम तोड़ दिया।
यही नहीं, स्थानीय लोगों का दावा है कि दो अन्य महिलाओं की भी दूषित जल के कारण जान गई है, हालांकि प्रशासन ने अभी तक इनकी पुष्टि नहीं की है। क्षेत्र के निवासी जितेंद्र प्रजापत ने बताया कि उनकी 50 वर्षीय बड़ी बहन सीमा प्रजापत की सोमवार को मौत हो गई। उन्होंने कहा, “बहन को अचानक उल्टियां शुरू हुईं और अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उनकी सांसें थम गईं।” जितेंद्र ने यह भी बताया कि पिछले कुछ दिनों से सप्लाई होने वाला पानी ‘कड़वा’ लग रहा था, जिससे आशंका है कि जलशोधन के लिए रसायनों का अधिक उपयोग किया गया हो।
इसी तरह, चंद्रकला यादव ने बताया कि उनकी 70 वर्षीय सास उर्मिला यादव को शनिवार (27 दिसंबर) को तबीयत बिगड़ने के बाद भर्ती कराया गया था, जिनकी रविवार को इलाज के दौरान मृत्यु हो गई।
80 किलोमीटर दूर से आता है पानी
गौरतलब है कि इंदौर अपनी जल आपूर्ति के लिए पूरी तरह नर्मदा नदी पर आश्रित है। नगर निगम की पाइपलाइन के माध्यम से नर्मदा का जल पड़ोसी खरगोन जिले के जलूद से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी तय कर इंदौर के घर-घर तक पहुंचता है। अब इस आपूर्ति तंत्र की शुद्धता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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