खामोश उपराष्ट्रपति: 100 दिनों का मौन, क्या है जगदीप धनखड़ का अनकहा सच?

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खामोश उपराष्ट्रपति: 100 दिनों का मौन, क्या है जगदीप धनखड़ का अनकहा सच?
पीएम मोदी के 'सबसे बड़े प्रशंसक' जगदीप धनखड़ 100 दिनों से चुप क्यों? कांग्रेस ने पूछा- आखिर क्या है रहस्य?

पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ के अप्रत्याशित इस्तीफे के 100 दिन: खामोशी और अनुत्तरित प्रश्न

कांग्रेस ने बुधवार को भारतीय राजनीति के इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना के 100 दिन पूरे होने पर पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की खामोशी पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का दावा है कि धनखड़ को अपने पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया था, और 100 दिन बीत जाने के बाद भी उनका विदाई समारोह नहीं हुआ है, जो एक चिंताजनक स्थिति है।

अप्रत्याशित इस्तीफा और विदाई का अभाव

इस साल संसद के मानसून सत्र की शुरुआत में, जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफा दे दिया था। उनके इस निर्णय ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी, खासकर तब जब वे सार्वजनिक मंचों पर प्रधानमंत्री की प्रशंसा करते नजर आ रहे थे। इस इस्तीफे के बाद हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में राजग के उम्मीदवार सी पी राधाकृष्णन विजयी हुए।

कांग्रेस का आरोप: ‘मजबूर किया गया इस्तीफा’

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, “21 जुलाई की देर रात अचानक और आश्चर्यजनक रूप से, भारत के तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया था। उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया था, भले ही उन्होंने दिन-ब-दिन प्रधानमंत्री की प्रशंसा की हो।” रमेश ने इस बात पर जोर दिया कि “रोजाना सुर्खियों में रहने वाले पूर्व उपराष्ट्रपति 100 दिनों से बिल्कुल खामोश हैं।”

लोकतांत्रिक परंपराओं पर सवाल

जयराम रमेश ने राज्यसभा के सभापति के रूप में धनखड़ के कार्यकाल को भी याद किया। उन्होंने कहा, “राज्यसभा के सभापति के रूप में पूर्व उपराष्ट्रपति विपक्ष के अच्छे मित्र नहीं थे। वह लगातार और गलत तरीके से विपक्ष की खिंचाई करते रहते थे। फिर भी, लोकतांत्रिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए, विपक्ष कहता रहा है कि वह कम से कम अपने सभी पूर्ववर्तियों की तरह विदाई समारोह के हकदार हैं। ऐसा नहीं हुआ है।”

चिंता और अटकलें

जगदीप धनखड़ के इस अप्रत्याशित इस्तीफे के बाद 100 दिनों तक पूरी तरह से खामोश रहने के कारण राजनीतिक हलकों में व्यापक अटकलें और चिंताएं फैल गई हैं। कांग्रेस नेताओं ने सरकार से धनखड़ के इस्तीफे के पीछे के वास्तविक कारणों पर स्पष्टता प्रदान करने का आग्रह किया है। यह घटना लोकतांत्रिक परंपराओं और सार्वजनिक पदों की गरिमा पर एक महत्वपूर्ण प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।


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