KIWG 2026: आर्मी का आइस हॉकी में स्वर्णिम दबदबा, हरियाणा बना ओवरऑल चैंपियन, लद्दाख रहा उपविजेता

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KIWG 2026: आर्मी का आइस हॉकी में स्वर्णिम दबदबा, हरियाणा बना ओवरऑल चैंपियन, लद्दाख रहा उपविजेता
KIWG 2026: आर्मी ने बरकरार रखा आइस हॉकी स्वर्ण, हरियाणा ओवरऑल चैंपियन, मेज़बान लद्दाख दूसरे स्थान पर | KIWG 2026: Indian Army Rules the Ice! Retains Ice Hockey Gold as Haryana Clinches Overall Championship Title

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गणतंत्र दिवस की बर्फीली जंग: भारतीय सेना ने चंडीगढ़ को हराकर बरकरार रखा आइस हॉकी स्वर्ण का वर्चस्व

oi-Naveen Sharma

Published: Monday, January 26, 2026, 20:09 [IST]

गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर एनडीएस स्टेडियम में खेले गए रोमांचक फाइनल में भारतीय सेना की अनुभवी टीम को पुरुष वर्ग के आइस हॉकी स्वर्ण पदक को बरकरार रखने के लिए जुझारू चंडीगढ़ के खिलाफ अपनी पूरी क्षमता झोंकनी पड़ी। सेना की टीम ने चंडीगढ़ को 3-2 से हराकर खिताब अपने नाम किया। मैच का निर्णायक गोल अंतिम हूटर से महज़ तीन मिनट पहले आया और केआईडब्ल्यूजी 2026 के लद्दाख चरण का इससे बेहतर और रोमांचक समापन हो ही नहीं सकता था।

हरियाणा बना टीम चैंपियन

हरियाणा ने अपने फिगर स्केटिंग और आइस स्केटिंग खिलाड़ियों द्वारा जीते गए चार स्वर्ण पदकों की बदौलत केआईडब्ल्यूजी 2026 के लद्दाख चरण की टीम चैंपियनशिप ट्रॉफी अपने नाम की। लद्दाख, महाराष्ट्र और तेलंगाना ने दो-दो स्वर्ण पदक जीते, लेकिन रजत पदकों की संख्या के आधार पर उनका स्थान तय हुआ। लद्दाख (5 रजत), महाराष्ट्र (3 रजत) और तेलंगाना (2 रजत) इसी क्रम में पदक तालिका में रहे।

चंडीगढ़ की जबरदस्त चुनौती

चंडीगढ़ की पुरुष आइस हॉकी टीम उस समय पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गई, जब उसने शनिवार को सेमीफाइनल में मेज़बान लद्दाख को 3-2 से हराकर सभी को चौंका दिया। केआईडब्ल्यूजी 2025 से आइस हॉकी खेलना शुरू करने वाली इस टीम का फाइनल में पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि रही। फाइनल में आर्मी के खिलाफ चंडीगढ़ ने साबित कर दिया कि लद्दाख के खिलाफ मिली जीत कोई संयोग नहीं थी। दो गोल से पिछड़ने के बाद जोरदार वापसी करते हुए लगभग मैच को अतिरिक्त समय तक ले जाना काबिले-तारीफ रहा। दिलचस्प बात यह रही कि लीग चरण में चंडीगढ़ को आर्मी के खिलाफ 10-1 से हार का सामना करना पड़ा था।

एनडीएस स्टेडियम ने शायद इस बार जैसा गणतंत्र दिवस पहले कभी नहीं देखा था। 5000 दर्शकों की क्षमता वाला नया और छत से ढका स्टेडियम फाइनल के निर्धारित समय से एक घंटे से भी अधिक समय पहले ही पूरी तरह भर चुका था। छठे मिनट में पद्मा नामग्याल के लंबे रेंज के फ्लिक से आर्मी ने पहला गोल किया। पहले पीरियड के 10वें मिनट में त्सेवांग दोरजे ने एक और दमदार शॉट के साथ बढ़त दोगुनी कर दी।

हालांकि चंडीगढ़ ने हार नहीं मानी। दूसरे पीरियड में कोई गोल नहीं हुआ, लेकिन चंडीगढ़ ने बेहद अनुशासित और साफ-सुथरा खेल दिखाया। फाइनल मुकाबले में आमतौर पर दिखने वाली शारीरिक टक्कर कम रही और मुकाबला कौशल के लिहाज़ से आकर्षक रहा।

आख़िरी क्वार्टर में चंडीगढ़ ने ज़ोरदार वापसी की और महज़ तीन मिनट के भीतर दो गोल दाग दिए। मैच में आठ मिनट शेष रहते गुरतेज सिंह भट्टी ने आर्मी की रक्षा पंक्ति को भेदते हुए गोल किया, इसके बाद बिरशाहांजित सिंह ने आर्मी के गोलपोस्ट के पीछे से आते हुए शानदार फ्लिक के जरिए स्कोर 2-2 कर दिया। रेफरी ने 10 मिनट से अधिक समय तक समीक्षा के बाद यह गोल चंडीगढ़ के नाम किया।

चंडीगढ़ की शानदार वापसी से चौंकी आर्मी ने इसके बाद आक्रामक खेल दिखाया और लगातार विरोधी गोल पर दबाव बनाया। इसी दौरान जब चंडीगढ़ की रक्षा पंक्ति एक बार चूकी, तो पद्मा नोरबू ने निर्णायक गोल कर सेना को जीत दिला दी।

विजेताओं की जुबानी

चंडीगढ़ के मुख्य कोच गौरव रहेजा ने कहा, “मेरा मानना है कि असली विजेता हम ही हैं। यह एक असाधारण अनुभव रहा और यह सब ईश्वर की कृपा से संभव हुआ। यह सफर हमारे लिए बहुत मायने रखता है। हम अगली बार और अधिक मेहनत करेंगे, ज़्यादा समर्पण के साथ अभ्यास करेंगे और राज्य स्तर तथा उससे आगे ट्रॉफियों के लिए लड़ेंगे।”

गोल करने वाले बिरशाहांजित सिंह ने कहा, “मैं पिछले आठ वर्षों से इनलाइन हॉकी खेल रहा हूं और उससे मुझे स्केटिंग, ड्रिबलिंग और पक-कंट्रोल में काफी आत्मविश्वास मिला है। मुझे लगता है कि आज मैंने उस नियंत्रण को रिंक पर दिखाया। आइस पर यह मेरा केवल दूसरा साल है। पिछले साल हमारी टीम पांवें स्थान पर रही थी और मुझे लगता है कि हमने तब से काफी प्रगति की है। मुझे पूरा भरोसा है कि अगले साल हम स्वर्ण पदक के लिए खेलेंगे।”

आर्मी के लिए पहला गोल करने वाले पद्मा नामग्याल ने स्वीकार किया कि अंतिम क्षणों में 2-2 की बराबरी के बाद उनकी टीम दबाव में आ गई थी। उन्होंने साई मीडिया से कहा, “सच कहूं तो हमें उम्मीद नहीं थी कि वे इतने अच्छे होंगे। उन्होंने वाकई शानदार खेल दिखाया, हालांकि आज हमारा प्रदर्शन भी सर्वश्रेष्ठ नहीं रहा। कम अनुभव वाली टीमों के खिलाफ खेलते समय ऐसा हो जाता है। आईटीबीपी के खिलाफ हमने कोई जोखिम नहीं लिया था। लेकिन आज चंडीगढ़ ने जो किया, उसकी तारीफ करनी होगी।”

गणतंत्र दिवस के अवसर पर एनडीएस स्टेडियम में खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2026 की शुरुआत 2000 मीटर शॉर्ट ट्रैक मिक्स्ड रिले हीट्स से हुई। यह प्रतियोगिता देश के शीर्ष स्पीड स्केटर्स को एक मंच पर लाने वाला सबसे रोमांचक इवेंट मानी जाती है।

कुल छह टीमों ने अपनी सर्वश्रेष्ठ संयोजन के साथ भाग लिया। टीमों को तीन-तीन के दो हीट्स में बांटा गया, जिनमें से सर्वश्रेष्ठ तीन टीमों ने फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। इस इवेंट का महत्व इसलिए भी बढ़ गया था क्योंकि नयना श्री तलुरी (तेलंगाना), स्कारमा त्सुल्टिम (लद्दाख) और सचिन सिंह (हरियाणा) अपने तीसरे स्वर्ण पदक की दौड़ में थे।

हालांकि, हीट्स के दौरान समीकरण बदल गए। हीट नंबर-1 में तेलंगाना और तमिलनाडु को अयोग्य घोषित कर दिया गया, जबकि हीट नंबर-2 में हरियाणा की टीम अंतिम स्थान पर रही और पदक की दौड़ से बाहर हो गई।

इसके बाद फाइनल में महाराष्ट्र, मेज़बान लद्दाख और कर्नाटक की टीमें आमने-सामने थीं। सबसे मजबूत लाइन-अप के साथ उतरी महाराष्ट्र की टीम ने अपने प्रदर्शन से इसे साबित भी किया। ईशान दारवेकर, अन्वयी देशपांडे, सोहन तारकर और शलीन फर्नांडिस की चौकड़ी ने शानदार तालमेल दिखाते हुए 3 मिनट 22.47 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता।

मेज़बान लद्दाख की टीम (जिसकी अगुवाई तेज़तर्रार स्कारमा त्सुल्टिम कर रही थीं), ने अच्छी शुरुआत की लेकिन अंततः 3 मिनट 29.34 सेकंड के साथ रजत पदक से संतोष करना पड़ा। कर्नाटक की टीम ने बिना कोई जोखिम लिए अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। यह टीम कांस्य से काफी ख़ुश नज़र आई।

आइस-स्केटिंग प्रतियोगिता के समापन पर लद्दाख की स्कारमा त्सुल्टिम चार पदकों के साथ सबसे सफल खिलाड़ियों में रहीं। उन्होंने महिला 1000 मीटर लॉन्ग ट्रैक और रिले में स्वर्ण, जबकि 500 मीटर लॉन्ग ट्रैक और मिक्स्ड रिले में रजत पदक जीता। महाराष्ट्र के ईशान दारवेकर (दो स्वर्ण) और अन्वयी देशपांडे (एक स्वर्ण) ने तीन-तीन पदकों के साथ खेलों का समापन किया।

तेलंगाना की नयना श्री तलुरी, जिन्होंने खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2025 में स्वर्ण पदकों की हैट्रिक लगाई थी, इस बार दो व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहीं। हरियाणा के सचिन सिंह ने भी दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए।

राष्ट्रीय आइस-स्केटिंग कोच मोहम्मद अब्बास नोरदक ने प्रतियोगिता के स्तर में आए सुधार की सराहना की। उन्होंने कहा, “पिछले पांच संस्करणों की तुलना में इस बार आइस-स्केटिंग का स्तर काफ़ी बेहतर रहा। खिलाड़ियों की टाइमिंग, तकनीक और निरंतरता में स्पष्ट सुधार देखने को मिला।”

उन्होंने आगे कहा, “पुरुष वर्ग में तेलंगाना के मुथाकानी विष्णु वर्धन और हरियाणा के सचिन सिंह ने प्रभावशाली टाइमिंग और रेस निष्पादन के साथ बेहतरीन प्रदर्शन किया। वहीं महिला वर्ग में नयना और स्कारमा ने लगातार प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन किया।”

भविष्य की रूपरेखा पर बात करते हुए अब्बास ने अंतरराष्ट्रीय अनुभव की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। अब्बास ने साई मीडिया से कहा, “अब अगला कदम इन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बेहतर सहयोग, एक्सपोज़र और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेलने के अवसर देना है। विदेशी टूर्नामेंटों में भागीदारी से उन्हें उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा समझने और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए बेहतर तैयारी में मदद मिलेगी।”

आइस-स्केटिंग (2000 मीटर शॉर्ट ट्रैक मिक्स्ड रिले) परिणाम

  1. महाराष्ट्र (ईशान दारवेकर, अन्वयी देशपांडे, सोहन तारकर, शलीन फर्नांडिस) – 3:22.47 सेकंड
  2. लद्दाख (स्कारमा त्सुल्टिम, स्तांजिन जम्पाल, तस्निया शमीम, मोहम्मद सक़ाफ़ रज़ा) – 3:29.34 सेकंड
  3. कर्नाटक (जी.वी. राघवेंद्र, सृजा एस. राव, ओंकारा योगराज, सहस्रा नेल्लातुरी) – 3:57.01 सेकंड

आइस हॉकी फ़ाइनल (पुरुष)- आर्मी ने चंडीगढ़ को 3-2 से हराया


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