मांझी का ’15 ग्राम’ संदेश और चिराग का ‘लड़ना सीखो’ – बिहार NDA में सीट बंटवारे से पहले सियासी गरमाहट
बिहार विधानसभा चुनावों की सरगर्मी के बीच, सत्ता के गलियारों में सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही चर्चाओं ने एक नया मोड़ ले लिया है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने एनडीए सहयोगियों के साथ होने वाली सीट बंटवारे की बातचीत से ठीक पहले एक काव्यात्मक और गूढ़ पोस्ट शेयर कर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
पांडवों की तरह ’15 ग्राम’ की मांग?
मांझी ने महान कवि रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध रचना ‘रश्मिरथी’ की पंक्तियाँ उद्धृत कीं, जिनमें पांडवों द्वारा कौरवों से केवल पाँच गाँव मांगे गए थे, और बाकी राज्य अपने पास रखने की बात कही गई थी। मांझी की पोस्ट का मुख्य अंश था: “हो न्याय अगर तो आधा दो, यदि उसमें भी कोई बाधा हो, तो दे दो केवल 15 ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम, HAM वही ख़ुशी से खाएंगें, परिजन पे असी ना उठाएँगे।”
हालांकि, मांझी ने मूल पाठ में एक ‘सूक्ष्म किंतु स्पष्ट’ बदलाव किया। ‘पाँच गाँव’ की जगह उन्होंने ’15 ग्राम’ (15 गांव) की मांग का संकेत दिया। इस बदलाव ने तुरंत ही कयासों को हवा दे दी कि गठबंधन की सीट-बंटवारे की व्यवस्था में HAM की 15 सीटें चाहने की मंशा है।
चिराग का ‘हर कदम पर लड़ना’ का आह्वान
मांझी के इस संदेश से पहले, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान भी एक रहस्यमयी पोस्ट के जरिए अपनी बात रख चुके हैं। अपने पिता और लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए, चिराग ने एक प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने उन्हें हर परिस्थिति में “लड़ना सीखने” की सीख दी थी।
चिराग ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर हिंदी में लिखा, “पापा हमेशा कहते थे, गुनाह मत करो, गुनाह मत सहो। जीना है तो मरना सीखो, हर कदम पर लड़ना सीखो।” यह संदेश, राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो, सीट बंटवारे को लेकर चल रही खींचतान में अपनी स्थिति पर अडिग रहने और अपनी मांगों को मजबूती से रखने का संकेत दे रहा है।
NDA की बैठकों का दौर जारी
ऐसे में, एनडीए के सहयोगी दल सीटों के बंटवारे पर आम सहमति बनाने के लिए गहन बैठकों का दौर चला रहे हैं। बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को चिराग पासवान के साथ इस अहम मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की। इस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े, जो बिहार में पार्टी के संगठन प्रभारी भी हैं, और राज्य सरकार में मंत्री मंगल पांडे भी उपस्थित रहे। इन मुलाकातों से यह स्पष्ट है कि एनडीए नेतृत्व अपने सहयोगियों को साधने और गठबंधन में एकजुटता बनाए रखने की पुरजोर कोशिश कर रहा है, ताकि आगामी चुनावों में एक मजबूत मोर्चा पेश किया जा सके।
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