भारत-रूस रक्षा सहयोग: एक अटूट साझेदारी की नई उड़ान
नई दिल्ली के मंच पर भारत और रूस की रक्षा कूटनीति का संगम हुआ, जहाँ सैन्य एवं सैन्य तकनीकी सहयोग पर भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की 22वीं मंत्रिस्तरीय बैठक ने दोनों देशों के बीच मज़बूत होते संबंधों को एक नया आयाम दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके रूसी समकक्ष आंद्रेई बेलौसोव ने सहयोग के विविध आयामों पर गहन चर्चा की, जिससे द्विपक्षीय रक्षा संबंधों की गति को नई ऊर्जा मिली।
समय-परीक्षित मित्र, विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूस को भारत का “समय-परीक्षित, विशेषाधिकार प्राप्त और रणनीतिक साझेदार” बताते हुए कहा, “मैं हमारे देशों के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग पर चर्चा करने और उसे बढ़ावा देने के लिए भारत आने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूँ।” उन्होंने 2000 में भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की घोषणा के बाद से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई अभूतपूर्व वृद्धि पर प्रकाश डाला। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत-रूस रक्षा सहयोग का स्वस्थ गति से आगे बढ़ना, दोनों देशों के बीच विश्वास और सहक्रिया का प्रमाण है। सशस्त्र बलों के कर्मियों और विशेषज्ञों के बीच परिणाम-उन्मुख आदान-प्रदान ने इस साझेदारी की गति को बनाए रखा है।
आर्थिक सहयोग और शिखर सम्मेलन की गूंज
राजनाथ सिंह ने मास्को में व्यापार और आर्थिक सहयोग पर भारत-रूस कार्य समूह की 26वीं बैठक की सफलता का स्वागत किया और रूस के नेतृत्व वाले यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते के लिए वार्ता शुरू होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूसी संघ के राष्ट्रपति महामहिम व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा का उत्सुकता से इंतज़ार था, जिसका आज समापन हुआ। नेताओं के इस शिखर सम्मेलन ने दोनों देशों के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त साझेदारी को और मज़बूत करने का मार्ग प्रशस्त किया।
गहरी परंपराएं, रणनीतिक महत्व
रूसी रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव ने भारतीय धरती पर मिलकर खुशी जाहिर करते हुए कहा, “हमारे देश एक मज़बूत, समय-सिद्ध मित्रता से बंधे हैं, जो पारस्परिक सम्मान पर आधारित है।” उन्होंने रूसी और भारतीय राष्ट्रों की विशिष्टताओं से जुड़ी गहरी परंपराओं पर प्रकाश डाला और बताया कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों का एक रणनीतिक स्वरूप है। भारत के साथ साझेदारी दक्षिण एशियाई क्षेत्र में संतुलन और सामान्य रूप से वैश्विक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है। रूस थल सेना, वायु सेना और नौसेना के नए दृष्टिकोण के निर्माण में भारत के साथ पूर्ण सहयोग करता है। इस अवसर पर, उन्होंने भारतीय नौसेना को राष्ट्रीय नौसेना दिवस की बधाई भी दी।
यह बैठक न केवल रक्षा सहयोग को गहरा करने का मंच बनी, बल्कि दोनों देशों के बीच सदियों पुरानी दोस्ती और साझा रणनीतिक हितों का भी प्रतीक है। भारत और रूस के बीच यह अटूट साझेदारी आने वाले समय में भी विश्व सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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