कंप्यूटर विज्ञान में भारतीय ज्ञान प्रणाली: जब प्राचीन मेधा ने गढ़ा भविष्य का एल्गोरिद्म!
भोपाल: क्या आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान की गहरी जड़ें प्राचीन भारतीय ज्ञान में छिपी हो सकती हैं? इसी जिज्ञासा और गहन विषय पर चिंतन करने के लिए "शोध आयाम" (मध्य भारत प्रांत, प्रज्ञा प्रवाह) के तत्वावधान में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण संवाद में, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के कंप्यूटर विज्ञान एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की वरिष्ठ संकाय और दीनदयाल उपाध्याय कौशल केंद्र की पूर्व निदेशक डॉ. माया इंगले ने अपना प्रभावशाली व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसका विषय था “कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता”।
डॉ. माया इंगले ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में इस मिथक को तोड़ा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अध्यात्म और दर्शन तक ही सीमित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका विस्तार गणित, भाषाविज्ञान, तर्कशास्त्र, चिकित्सा विज्ञान और खगोलशास्त्र जैसे गूढ़ क्षेत्रों तक है, जहाँ इसने अतुलनीय योगदान दिए हैं।
डॉ. इंगले ने गहराई से समझाया कि कैसे सदियों पहले पाणिनी द्वारा रचित ‘अष्टाध्यायी’ आधुनिक कम्पाइलर डिज़ाइन और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP) के लिए एक मूलभूत आधार प्रस्तुत करती है। इसी तरह, पिंगलाचार्य का ‘छंदसूत्र’ आज के बाइनरी संख्याओं और एल्गोरिद्म की प्रारंभिक अवधारणाओं का अद्भुत पूर्वज प्रतीत होता है। उन्होंने आगे बताया कि गणित के क्षेत्र में महावीर और भास्कराचार्य जैसे दिग्गजों द्वारा प्रतिपादित सूत्र, क्रमचय-संचय और प्रायिकता सिद्धांत में आज भी उतने ही प्रासंगिक और उपयोगी हैं, जितने अपने काल में थे।
वैदिक गणित की शक्ति पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. इंगले ने उल्लेख किया कि यह उच्च गति वाले गणनात्मक कार्यों, क्रिप्टोग्राफी और अत्याधुनिक एल्गोरिद्म डिज़ाइन के लिए आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वामी भारती कृष्ण तीर्थ द्वारा संकलित 16 सूत्र और उपसूत्र, वस्तुतः आज की डिजिटल दुनिया के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलते हैं।
इस चर्चा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का भी उल्लेख किया गया, जिसने शिक्षा के सभी स्तरों पर भारतीय ज्ञान प्रणाली को समाहित करने की पुरजोर अनुशंसा की है। ज्ञान, प्रज्ञा (बुद्धिमत्ता), और सत्य (सत्य की खोज) को सर्वोच्च मानवीय आदर्श मानने वाली हमारी प्राचीन भारतीय परंपरा, आज भी शिक्षा और गहन शोध के लिए एक अचूक मार्गदर्शक बनी हुई है।
डॉ. इंगले ने ज़ोर देकर कहा कि भारतीय विद्वानों के मौलिक विचार और अमूल्य सूत्र, आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग, प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP), डेटा माइनिंग और सॉफ्टवेयर सुरक्षा जैसे अग्रिम क्षेत्रों में केवल प्रासंगिक ही नहीं हैं, बल्कि ये इन विषयों की गहरी जड़ों को समझने के लिए भी अपरिहार्य हैं।
संगोष्ठी में मौजूद शोधार्थियों, विद्यार्थियों और प्राध्यापकों ने एक स्वर में इस बात पर अपनी सहमति व्यक्त की कि भारतीय ज्ञान परंपरा वस्तुतः एक "स्वर्ण भंडार" है, जिसे अब और अधिक विलंब किए बिना, पुनः खोजना और आधुनिक शिक्षा व अनुसंधान के लिए उपयोग में लाना अपरिहार्य है।
इस प्रेरणादायक संगोष्ठी का समापन इस दृढ़ संकल्प के साथ हुआ कि इस दिशा में गहन अनुसंधान और अध्ययन को निरंतर बढ़ावा दिया जाएगा।
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