दक्षिण कश्मीर में दिल दहला देने वाली घटना: लापता पैराट्रूपर का शव बरामद, दूसरे की तलाश जारी
दक्षिण कश्मीर के कोकरनाग के मनोरम लेकिन खतरनाक ऊपरी इलाकों से एक दुखद खबर सामने आई है। गुरुवार को, एक लापता पैराट्रूपर का क्षत-विक्षत शव बरामद किया गया, जिसने तीन दिन पहले एक आतंकवाद-रोधी अभियान के दौरान अपनी जान गंवाई थी। अधिकारियों के अनुसार, यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना संभवतः एक भयावह हिमस्खलन या बर्फ़ीले तूफ़ान का परिणाम थी, जिसने इस साहसी सैनिक के जीवन को छीन लिया।
यह जवान अपने रूकसाक और हथियार के साथ मिला, जो उस भयानक पल का मूक गवाह था जब वह प्रकृति की विनाशकारी शक्तियों से टकराया था। हालांकि, इस अभियान से लापता हुए एक अन्य बहादुर पैराट्रूपर की तलाश अभी भी जारी है, जिसने हर किसी के दिलों में चिंता की लहर दौड़ा दी है।
अधिकारियों ने बताया कि दोनों लापता सैनिक 6 और 7 अक्टूबर को खराब मौसम की वजह से बाधित एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन का हिस्सा थे। यह आशंका जताई जा रही है कि मिशन के दौरान हिमस्खलन या बर्फ़ीले तूफ़ान की चपेट में आने से इन वीर जवानों की जान गई।
यह बरामदगी ऐसे समय में हुई है जब सेना को उच्च ऊँचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन चुनौतियों के बीच, सेना ने दूसरे लापता सैनिक की तलाश के लिए कोकरनाग क्षेत्र में एक व्यापक खोज और बचाव अभियान शुरू किया है। हालांकि, खराब मौसम और भारी बर्फबारी के कारण इन प्रयासों में बाधा आ रही है, जिससे न केवल बचाव दल बल्कि उन लापता सैनिकों के लिए भी जोखिम बढ़ गया है।
यह घटना कश्मीर से कुछ ही दूरी पर लद्दाख के सियाचिन बेस कैंप में हुई एक और भयावह घटना की याद दिलाती है। हाल ही में हुए एक बड़े हिमस्खलन में दो अग्निवीरों सहित तीन सैन्यकर्मियों को अपनी जान गँवानी पड़ी थी। सूत्रों के अनुसार, “दुनिया के सबसे ऊँचे युद्धक्षेत्र” के रूप में कुख्यात सियाचिन में बचाव अभियान जारी था, तभी यह दुखद हादसा हुआ।
सियाचिन हिमस्खलन में गुजरात, उत्तर प्रदेश और झारखंड के महार रेजिमेंट के कई सैनिक शहीद हो गए। पाँच घंटे तक मलबे में फंसे रहने के बाद उनकी दुखद मृत्यु हुई, जबकि एक सेना कैप्टन को चमत्कारिक रूप से बचा लिया गया। सियाचिन ग्लेशियर में इस तरह के हिमस्खलन कोई नई बात नहीं हैं, जहाँ 20,000 फीट तक की ऊँचाई पर तापमान -60 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है, जिससे यहां जीवन अत्यंत दुष्कर हो जाता है।
इस बीच, एक अन्य चिंताजनक घटना में, सोमवार को लद्दाख के माउंट कुन पर सेना का एक दस्ता हिमस्खलन की चपेट में आ गया था, जो इन दुर्गम क्षेत्रों में सेना द्वारा सामना किए जा रहे खतरों को उजागर करता है।
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