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शौर्य और संकल्प का पर्व: जानिए क्यों मनाया जाता है पराक्रम दिवस?
हर साल 23 जनवरी का दिन भारतीय इतिहास में एक विशेष स्थान रखता है। यह वह तारीख है जब महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म हुआ था। इस दिन को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का निर्णय भारत सरकार द्वारा लिया गया था। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर इस दिन को ‘जयंती’ के बजाय ‘पराक्रम दिवस’ नाम से क्यों जाना जाता है? इसके पीछे की वजह क्या है और इसका क्या महत्व है? आइए, इस लेख के माध्यम से इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं।
सरकार का फैसला और इसके पीछे की वजह
साल 2021 में, केंद्र सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया। इसका मुख्य उद्देश्य नेताजी के जीवन से जुड़े ‘सुभाष चंद्र बोस’ और ‘INAI875’ (उनके जन्मदिन के अंकों के आधार पर) नामक दो विशेष पोर्टलों को लॉन्च करना था। सरकार का मानना है कि नेताजी का जीवन केवल जन्मदिन मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के लिए उनके अदम्य साहस और अनूठे संघर्ष का प्रतीक है। जयंती मनाने की परंपरागत परिभाषा से आगे बढ़कर, इस दिन को उनके ‘पराक्रम’ को समर्पित करने का निर्णय लिया गया।
ऐतिहासिक महत्व: आजाद हिंद फौज और अंतिम दिन
नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन संघर्ष और शौर्य से भरा रहा। उन्होंने ब्रिटिश राज से लोहा लेने के लिए ‘आजाद हिंद फौज’ (INA) का गठन किया। उनके नेतृत्व में यह फौज अंग्रेजों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई। 23 जनवरी का दिन इसलिए भी खास है क्योंकि 1976 में इसी तारीख को उनकी मृत्यु हुई थी (हालांकि उनकी मृत्यु को लेकर आज भी रहस्य बना हुआ है)। इस दिन को मनाकर देश उनके उस पराक्रम को याद करता है, जिसने भारत की आजादी की लड़ाई में एक नई ऊर्जा और दिशा दी।
पराक्रम दिवस का महत्व
पराक्रम दिवस का महत्व केवल एक उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशवासियों को प्रेरणा देने का एक माध्यम है।
- नवीन पीढ़ी को प्रेरणा: आज की युवा पीढ़ी को नेताजी के जीवन सिद्धांतों से रूबरू कराना इस दिन का मुख्य उद्देश्य है।
- देशभक्ति का संदेश: यह दिन हमें याद दिलाता है कि देश के लिए समर्पण और पराक्रम का भाव किसी भी युग में कम नहीं होना चाहिए।
- राष्ट्रीय एकता: नेताजी के विचार ‘जय हिंद’ ने पूरे देश को एक सूत्र में बांधा था, और इस दिन को मनाकर उस एकता को बनाए रखने का संकल्प लिया जाता है।
निष्कर्ष
संक्षेप में, पराक्रम दिवस केवल एक कैलेंडर डेट नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक महानायक के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है। 23 जनवरी को हम नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती तो मनाते ही हैं, साथ ही उनके ‘पराक्रम’ को भी नमन करते हैं, ताकि उनका त्याग और बलिदान भावी पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहे।
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