महाराष्ट्र के किसान भारी बारिश से त्रस्त, शरद पवार ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल
हाल ही में महाराष्ट्र में हुई मूसलाधार बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। इस गंभीर मुद्दे पर एनसीपी (शरदचंद्र पवार) प्रमुख शरद पवार ने राज्य सरकार के रवैये पर गहरी नाराज़गी जताई है। उन्होंने विशेष रूप से गन्ने की फसलों को हुए भारी नुकसान को रेखांकित किया है और सरकार के फैसलों को किसानों के प्रति असंवेदनशील बताया है।
गन्ने की फसलों को व्यापक नुकसान, सरकार से उम्मीदें
पवार ने वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट के चौंकाने वाले आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मराठवाड़ा और पश्चिमी महाराष्ट्र के कई इलाकों में गन्ने की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। उन्होंने इस नुकसान के विस्तृत आकलन की आवश्यकता पर जोर दिया। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए, कल (12 तारीख को) एक गवर्निंग काउंसिल की बैठक बुलाई गई है, जिसमें राज्य की सभी चीनी मिलें शामिल होंगी। इस बैठक में क्षति के मूल्यांकन और भविष्य की रणनीति पर गहन चर्चा की जाएगी। शरद पवार ने राज्य सरकार से पुरजोर अपील करते हुए कहा है कि किसानों को अधिकतम सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
सीएम राहत कोष पर पवार का तीखा प्रहार
किसानों की मदद के नाम पर, शरद पवार ने राज्य सरकार के एक और फैसले को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की पीड़ा को समझने के बजाय, मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए गन्ना उत्पादकों से जबरन चंदा वसूलने का फरमान जारी कर रही है। पवार ने इस कदम को "पूरी तरह से गलत" करार दिया और मुख्यमंत्री से इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की है। यह स्पष्ट है कि शरद पवार किसानों के साथ हो रहे इस अन्याय को लेकर बेहद खफा हैं और सरकार को कटघरे में खड़ा करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।
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