लंदन की नीलामी में भारतीय कला का जलवा: टीपू सुल्तान की पिस्तौलें और रणजीत सिंह की पेंटिंग ने रचा इतिहास
लंदन में ‘आर्ट्स ऑफ द इस्लामिक वर्ल्ड एंड इंडिया’ शीर्षक से आयोजित नीलामी में भारतीय कलाकृतियों ने धूम मचा दी। इस बार की नीलामी में कुल एक करोड़ पाउंड से अधिक की राशि प्राप्त हुई, जिसमें ऐतिहासिक भारतीय कलाकृतियों ने अपने अनुमानित मूल्य से कहीं अधिक दाम हासिल कर सबको चौंका दिया।
टीपू सुल्तान की पिस्तौलें: शाही शान की गवाही
मैसूर के शासक रहे टीपू सुल्तान के लिए विशेष रूप से तैयार की गई चांदी जड़ी फ्लिंटलॉक पिस्तौलों की जोड़ी 11 लाख पाउंड में एक निजी संग्रहकर्ता के हाथ लगी। यह राशि अनुमानित मूल्य का लगभग 14 गुना थी, जो इन ऐतिहासिक हथियारों की मांग और महत्व को दर्शाता है। इन पिस्तौलों की खासियत यह थी कि वे ‘मिरर’ डिज़ाइन में बनाई जाती थीं – एक बाएं हाथ की ताली (लॉक) वाली और दूसरी दाएं हाथ की ताली वाली। कहा जाता है कि सुल्तान को यह संयोजन विशेष रूप से पसंद था और वे इन्हें अपने सार्वजनिक दरबारों में प्रदर्शित करते थे। यह पिस्तौलें 1799 में श्रीरंगपट्टनम की घेराबंदी के दौरान ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा टीपू सुल्तान के खजाने से मिली थीं, जब सुल्तान युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए थे और उनके कई कीमती शस्त्र ब्रिटेन ले जाए गए थे।
इन पिस्तौलों के अलावा, टीपू सुल्तान के लिए बनी एक अन्य चांदी जड़ी फ्लिंटलॉक ‘ब्लंडरबस’ या ‘बुकमार’ बंदूक भी 5 लाख 71 हजार 500 पाउंड में नीलाम हुई।
महाराजा रणजीत सिंह की पेंटिंग: सिख कला का नया कीर्तिमान
उन्नीसवीं सदी के सिख सम्राठ महाराजा रणजीत सिंह की एक बारीक चित्रकला 9 लाख 52 हजार 500 पाउंड (952,500 पाउंड) में बिकी। यह सिख कला के क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा कीर्तिमान है और इसे एक संस्थान ने खरीदा। इस पेंटिंग में कलाकार बिशन सिंह ने महाराजा रणजीत सिंह को लाहौर के एक बाजार से जुलूस में जाते हुए बेहद खूबसूरती से दर्शाया है।
संग्रहकर्ता संस्था ‘सोथबी’ के कैटलॉग के अनुसार, यह पेंटिंग महाराजा रणजीत सिंह को हाथी पर सवार होकर लाहौर के बाजार से गुजरते हुए दिखाती है। उनके साथ उनका भव्य दरबार, चंवर और छत्र धारी सेवक, बाज़ पालक तथा घोड़े और ऊंटों द्वारा खींची जाने वाली सवारियां हैं, जिनमें उनका पुत्र शेर सिंह, एक गणिका और उनके धार्मिक व राजनीतिक सलाहकार भाई राम सिंह तथा राजा गुलाब सिंह सम्मिलित हैं। चित्र के अग्रभाग में संन्यासी और सड़क कलाकार महाराजा का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि पृष्ठभूमि में शिल्पकार, पतंग बनाने वाले और दुकानदार अपने काम में व्यस्त दिखते हैं।
अन्य बहुमूल्य कलाकृतियाँ
इस नीलामी में भारतीय कलाकृतियों का बोलबाला रहा। मुगल सम्राट अकबर के पुस्तकालय से प्राप्त 16वीं सदी के उत्तरार्ध का एक दुर्लभ कुरान पांडुलिपि 8 लाख 63 हजार 600 पाउंड में नीलाम हुई। भारत से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं में 52 भारतीय परिधानों के चित्रों वाले एलबमों का एक सेट भी शामिल था, जो 225 वर्षों से एक ही परिवार के पास था और 6 लाख 9 हजार 600 पाउंड में बिका। एक मुगलकालीन जेड (जडाऊ) घोड़े के सिर के आकार के हत्थे वाला खंजर और उसकी म्यान 4 लाख 6 हजार 400 पाउंड में बिकी, जबकि भारत की 17वीं सदी की ‘पहाड़ी झील में खेलते हाथियों’ की एक पेंटिंग 1 लाख 39 हजार 700 पाउंड में नीलाम हुई।
इस सप्ताह की नीलामी में 20 प्रतिशत खरीदार नए थे, जो भारतीय कला में बढ़ती रुचि का संकेत है। नीलामी में भारत सहित 25 देशों के बोलीदाताओं ने हिस्सा लिया, जो इस आयोजन की अंतर्राष्ट्रीय महत्ता को रेखांकित करता है।
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