युवा कांग्रेस का ‘राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस’ पर अनोखा विरोध: मोदी के जन्मदिन पर चाय-पकौड़े का स्टॉल
नई दिल्ली: भारतीय युवा कांग्रेस ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को ‘राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस’ के रूप में मनाकर देश में बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। दिल्ली में आयोजित इस सांकेतिक विरोध प्रदर्शन में, युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने एक अनोखे अंदाज में चाय-पकौड़े का स्टॉल लगाया, जिसके माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि आज देश के युवा डिग्री धारक होने के बावजूद चाय और पकौड़े की दुकान लगाने को मजबूर हैं।
इस अवसर पर, युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “50 वर्षों में सबसे ज्यादा बेरोजगारी आज है। राहुल गांधी जी ने साबित कर दिया है और हम आज फिर से दोहराते हैं कि मोदी जी ‘वोट चोर’ हैं, ‘नौकरी चोर’ भी हैं।” उन्होंने आगे कहा, “मोदी जी ने देश के युवाओं से हर वर्ष दो करोड़ रोजगार देने का वादा किया था, उस हिसाब से आज देश में 16 करोड़ युवाओं को रोजगार मिल जाना चाहिए था, पर असलियत यह है 16 करोड़ युवाओं को रोजगार तो नहीं मिला पर 22 करोड़ लोगों के आवेदन जरूर आए।”
युवा कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर उनके स्टॉल को काले गुब्बारों से सजाया गया था, जो देश में व्याप्त निराशा और बेरोजगारी का प्रतीक था। संगठन ने इस प्रदर्शन के माध्यम से यह भी कहा कि जहां एक ओर प्रधानमंत्री का जन्मदिन मनाया जा रहा है, वहीं देश का नौजवान अभी भी रोजगार की तलाश में भटक रहा है।
“नौकरी चोर, गद्दी छोड़!” और “जो वोट चोर है वही नौकरी चोर है” जैसे नारों के साथ, हजारों युवाओं ने उदय भानु चिब के नेतृत्व में दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को चौराहे पर आकर जनता का सामना करने की चुनौती दी, यह कहते हुए कि जनता उन्हें गद्दी से धकेलने के लिए तैयार है। “मोदी जी, जुमले बहुत हुए… अब नौकरियां दीजिए!” का नारा लगाते हुए युवाओं ने स्पष्ट कर दिया कि वे अब और वादे नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने युवा कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन को रोकने की कोशिश की और बैरिकेडिंग लगाकर कार्यकर्ताओं को मार्च करने से रोका। युवा कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या मोदी-शाह इतने डरे हुए हैं कि उन्हें पुलिस का सहारा लेना पड़ रहा है? उन्होंने जोर देकर कहा कि विरोध प्रदर्शन करना उनका संवैधानिक अधिकार है और जनता की आवाज को सत्ता तक पहुंचाना उनका कर्तव्य है।
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