भाई-बहन के स्नेह का पर्व ‘भाई दूज’ – इस वर्ष 23 अक्टूबर को, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व!
हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला भाई दूज का पावन पर्व, भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। इस त्योहार को स्नेह और उल्लास के साथ धूमधाम से मनाया जाता है। विभिन्न नामों जैसे भाऊ बीज, यम द्वितीया, भ्रातृ द्वितीया और भाई द्वितीया से भी यह पर्व जाना जाता है।
इस वर्ष, त्योहार की सही तारीख को लेकर कुछ असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, परंतु अब स्पष्ट हो गया है कि भाई दूज का यह प्रेम भरा पर्व 23 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। तो आइए, बिना किसी देरी के जानते हैं इस वर्ष की सही तारीख, तिलक करने का शुभ मुहूर्त, व्रत कथा का महत्व, पूजा का समय और भाई दूज से जुड़ी संपूर्ण जानकारी।
भाई दूज कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, दिवाली के ठीक बाद आने वाली कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष, द्रिक पंचांग के अनुसार, यह पर्व 23 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा।
भाई दूज पर तिलक करने का शुभ मुहूर्त
भाई दूज पर तिलक की रस्म का विशेष महत्व है और यह मुख्य रूप से अपराह्न काल में की जाती है। तिलक करने के लिए सबसे शुभ समय दोपहर का होता है।
- भाई दूज अपराह्न का समय: दोपहर 12:40 बजे से दोपहर 2:59 बजे तक
- तिलक मुहूर्त: दोपहर 1:13 बजे से 3:28 बजे तक
भाई दूज शुभ मुहूर्त समय
- यम द्वितीया: गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025
- द्वितीया तिथि प्रारंभ: 22 अक्टूबर 2025 को रात्रि 8:16 बजे से
- द्वितीया तिथि समाप्त: 23 अक्टूबर 2025 को रात्रि 10:46 बजे
अन्य महत्वपूर्ण मुहूर्त:
- ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:05 बजे से प्रातः 04:55 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: 11:08 AM से 11:54 AM तक
- निशिता मुहूर्त: रात्रि 11:06 बजे से रात्रि 11:56 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 1:26 बजे से 2:12 बजे तक
भाई दूज का अनुष्ठान और महत्व
भाई दूज के दिन भाई-बहनों को सूर्योदय के साथ स्नान कर नए वस्त्र धारण करने चाहिए। बहनें इस दिन अपने भाई की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। शुभ मुहूर्त में बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं, आरती उतारती हैं और उन्हें स्वादिष्ट भोजन व मिठाइयां खिलाती हैं। वहीं, भाई भी अपनी प्यारी बहनों को उपहार स्वरूप वस्त्र और पैसे प्रदान करते हैं।
भाई दूज, जिसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है, यमराज और उनकी बहन यमुना के बीच के स्नेहपूर्ण बंधन का प्रतीक है। इस दिन भाईयों को तिलक करने से उनकी समृद्धि, दीर्घायु और यमराज का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस दिन यमुना नदी में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।
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