देवउठनी एकादशी: श्रीहरि की जागृति का पर्व, शुभ कार्यों का शुभारंभ!
हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व, देवउठनी एकादशी, हर वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष में आती है। यह वह पावन तिथि है जब भगवान विष्णु अपनी चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं, और इसके साथ ही शुभ और मांगलिक कार्यों का दौर फिर से शुरू होता है। यह एकादशी देवोत्थान एकादशी, देव प्रबोधिनी एकादशी और प्रबोधिनी एकादशी जैसे नामों से भी जानी जाती है। इस वर्ष, एकादशी तिथि के दो दिन पड़ने के कारण, व्रत की सही तिथि को लेकर कुछ दुविधा की स्थिति बनी हुई है।
व्रत की सही तिथि: एक स्पष्टीकरण
वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 1 नवंबर 2025 को प्रातः 9:12 बजे से प्रारंभ होगी और 2 नवंबर 2025 को सायं 7:23 बजे समाप्त होगी। इस जानकारी के आधार पर, गृहस्थ जीवन व्यतीत करने वाले लोग 1 नवंबर को और वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी 2 नवंबर को देवउठनी एकादशी का व्रत रखेंगे।
पवित्र पूजन विधि: श्रीहरि को प्रसन्न करने का विधान
देवउठनी एकादशी के पावन अवसर पर, सुबह शीघ्र उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों। तत्पश्चात, पीले वस्त्र धारण करें, क्योंकि पीला रंग भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। व्रत का संकल्प लेते हुए, मन में भगवान विष्णु का ध्यान करें। पूजन के उपरांत, आचमन करें और भगवान विष्णु को प्रिय पीले फूल, पीला चंदन, पवित्र तुलसी दल और पुष्पमाला अर्पित करें। प्रसाद के रूप में, पीली मिठाइयाँ, सिंघाड़े, गन्ने, मौसमी फल और शुद्ध जल का भोग लगाएं। घी का दीपक प्रज्वलित करें, धूप जलाएं और भगवान विष्णु के मंत्रों का उच्चारण करें।
इस दिन, विष्णु चालीसा का पाठ, देवउठनी एकादशी की व्रत कथा, श्रीहरि स्तुति और विष्णु मंत्रों का जाप करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। पूजा के अंत में, भगवान विष्णु की आरती करें और अनजाने में हुई किसी भी भूल या चूक के लिए क्षमा याचना करें।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


