धनतेरस 2025: धन-समृद्धि के दाता भगवान कुबेर की चालीसा, जानिए लाभ और महत्व
नई दिल्ली: धनतेरस का पर्व धन, समृद्धि और सुख-संपदा को घर लाने का एक अत्यंत शुभ अवसर माना जाता है। इस पावन दिन मां लक्ष्मी और धन के देवता भगवान कुबेर की विधिवत पूजा-अर्चना से घर में धन की वर्षा होती है। भगवान कुबेर, देवताओं के कोषाध्यक्ष के रूप में जाने जाते हैं और इन्हें धन, वैभव, खजाने तथा समस्त भौतिक सुखों का अधिपति माना गया है। धनतेरस के शुभ दिन पर कुबेर चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को अलौकिक लाभ प्राप्त होते हैं, जिससे जीवन में धन की कमी कभी नहीं रहती और व्यक्ति दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करता है।
कुबेर चालीसा (Shri Kuber Chalisa in Hindi)
॥ दोहा ॥
जैसे अटल हिमालय और जैसे अडिग सुमेर।
ऐसे ही स्वर्ग द्वार पै, अविचल खड़े कुबेर॥
विघ्न हरण मंगल करण, सुनो शरणागत की टेर।
भक्त हेतु वितरण करो, धन माया के ढेर॥
॥ चालीसा ॥
जय जय जय श्री कुबेर भंडारी।
धन माया के तुम अधिकारी॥
तप तेज पुंज निर्भय भय हारी।
पवन वेग सम सम तनु बलधारी॥
स्वर्ग द्वार की करें पहरे दारी।
सेवक इंद्र देव के आज्ञाकारी॥
यक्ष यक्षिणी की है सेना भारी।
सेनापति बने युद्ध में धनुधारी॥
महा योद्धा बन शस्त्र धारैं।
युद्ध करैं शत्रु को मारैं॥
सदा विजयी कभी ना हारैं।
भगत जनों के संकट टारैं॥
प्रपितामह हैं स्वयं विधाता।
पुलिस्ता वंश के जन्म विख्याता॥
विश्रवा पिता इडविडा जी माता।
विभीषण भगत आपके भ्राता॥
शिव चरणों में जब ध्यान लगाया।
घोर तपस्या करी तन को सुखाया॥
शिव वरदान मिले देवत्य पाया।
अमृत पान करी अमर हुई काया॥
धर्म ध्वजा सदा लिए हाथ में।
देवी देवता सब फिरैं साथ में॥
पीताम्बर वस्त्र पहने गात में॥
बल शक्ति पूरी यक्ष जात में॥
स्वर्ण सिंहासन आप विराजैं।
त्रिशूल गदा हाथ में साजैं॥
शंख मृदंग नगारे बाजैं।
गंधर्व राग मधुर स्वर गाजैं॥
चौंसठ योगिनी मंगल गावैं।
ऋद्धि सिद्धि नित भोग लगावैं॥
दास दासनी सिर छत्र फिरावैं।
यक्ष यक्षिणी मिल चंवर ढूलावैं॥
ऋषियों में जैसे परशुराम बली हैं।
देवन्ह में जैसे हनुमान बली हैं॥
पुरुषों में जैसे भीम बली हैं।
यक्षों में ऐसे ही कुबेर बली हैं॥
भगतों में जैसे प्रहलाद बड़े हैं।
पक्षियों में जैसे गरुड़ बड़े हैं॥
नागों में जैसे शेष बड़े हैं।
वैसे ही भगत कुबेर बड़े हैं॥
कांधे धनुष हाथ में भाला।
गले फूलों की पहनी माला॥
स्वर्ण मुकुट अरु देह विशाला।
दूर दूर तक होए उजाला॥
कुबेर देव को जो मन में धारे।
सदा विजय हो कभी न हारे।।
बिगड़े काम बन जाएं सारे।
अन्न धन के रहें भरे भंडारे॥
कुबेर गरीब को आप उभारैं।
कुबेर कर्ज को शीघ्र उतारैं॥
कुबेर भगत के संकट टारैं।
कुबेर शत्रु को क्षण में मारैं॥
शीघ्र धनी जो होना चाहे।
क्युं नहीं यक्ष कुबेर मनाएं॥
यह पाठ जो पढ़े पढ़ाएं।
दिन दुगना व्यापार बढ़ाएं॥
भूत प्रेत को कुबेर भगावैं।
अड़े काम को कुबेर बनावैं॥
रोग शोक को कुबेर नशावैं।
कलंक कोढ़ को कुबेर हटावैं॥
कुबेर चढ़े को और चढ़ादे।
कुबेर गिरे को पुन: उठा दे॥
कुबेर भाग्य को तुरंत जगा दे।
कुबेर भूले को राह बता दे॥
प्यासे की प्यास कुबेर बुझा दे।
भूखे की भूख कुबेर मिटा दे॥
रोगी का रोग कुबेर घटा दे।
दुखिया का दुख कुबेर छुटा दे॥
बांझ की गोद कुबेर भरा दे।
कारोबार को कुबेर बढ़ा दे॥
कारागार से कुबेर छुड़ा दे।
चोर ठगों से कुबेर बचा दे॥
कोर्ट केस में कुबेर जितावै।
जो कुबेर को मन में ध्यावै॥
चुनाव में जीत कुबेर करावैं।
मंत्री पद पर कुबेर बिठावैं॥
पाठ करे जो नित मन लाई।
उसकी कला हो सदा सवाई॥
जिसपे प्रसन्न कुबेर की माई।
उसका जीवन चले सुखदाई॥
जो कुबेर का पाठ करावे।
उसका बेड़ा पार लगावै॥
उजड़े घर को पुन: बसावै।
शत्रु को भी मित्र बनावै॥
सहस्त्र पुस्तक जो दान कराई।
सब सुख भोद पदार्थ पाई।
प्राण त्याग कर स्वर्ग में जाई।
मानस परिवार कुबेर कीर्ति गाई॥
॥ दोहा ॥
शिव भक्तों में अग्रणी,
श्री यक्षराज कुबेर।
हृदय में ज्ञान प्रकाश भर,
कर दो दूर अंधेर॥
कर दो दूर अंधेर अब,
जरा करो ना देर।
शरण पड़ा हूं आपकी,
दया की दृष्टि फेर।
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥
कुबेर चालीसा पाठ विधि
कुबेर चालीसा का पाठ करने के लिए, सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को पवित्र करें और भगवान कुबेर की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। एक दीपक जलाएं और चंदन, फूल तथा मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद, कुबेर मंत्र “ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये नमः” का 11 बार जाप करें। अंत में, पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव से कुबेर चालीसा का पाठ करें।
कुबेर चालीसा पाठ के लाभ (Benefits of Kuber Chalisa)
कुबेर चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से धन में वृद्धि होती है और आर्थिक संकटों का निवारण होता है। घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। व्यापार, नौकरी या किसी भी आर्थिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। भगवान कुबेर की आराधना से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा भी प्राप्त होती है। चालीसा का पाठ मन को शांति प्रदान करता है और आत्मविश्वास को बढ़ाता है।
अस्वीकरण: यह जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। किसी भी जानकारी को अपनाने से पहले किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी या पंडित की सलाह अवश्य लें।
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