फुटबॉल का नया इतिहास: ‘नन्हे’ केप वर्दे ने रचा महाचमत्कार, दुनिया को किया हैरान!
नई दिल्ली: फुटबॉल के मैदान पर एक छोटे से द्वीप राष्ट्र ने वो कर दिखाया है, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। केप वर्दे ने अपना स्वप्निल अभियान जारी रखते हुए शुक्रवार को सऊदी अरब के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ खेला और विश्व कप के नॉकआउट राउंड (राउंड ऑफ 32) में पहुंचने वाला दुनिया का सबसे छोटा देश बनकर इतिहास रच दिया।
ग्रुप-एच में केप वर्दे का सफर किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं रहा। अपने तीनों ग्रुप मैच ड्रॉ कराकर यह टीम दिग्गज स्पेन के बाद दूसरे स्थान पर रही और अगले दौर का टिकट कटा लिया। इसी ग्रुप में मौजूद उरुग्वे और सऊदी अरब जैसे दिग्गज दो-दो अंक ही जुटा सके और टूर्नामेंट से बाहर हो गए। अफ्रीका के पश्चिमी तट पर बसे इस नन्हे द्वीपीय राष्ट्र के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह पहली बार फुटबॉल के इस महाकुंभ का हिस्सा बना है।
केप वर्दे का यह सफर बाधाओं को तोड़ने वाला रहा है। उसने अपने पहले ही मैच में 2010 के विश्व विजेता स्पेन को गोलरहित ड्रॉ पर रोककर सनसनी फैला दी थी। इसके बाद उरुग्वे के खिलाफ पिछड़ने के बावजूद वापसी की और मैच 2-2 से बराबर किया। अब ‘राउंड ऑफ 32’ में 3 जुलाई को मियामी के मैदान पर इस टीम की भिड़ंत मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना से होगी।
विश्व कप के इतिहास में तीनों ग्रुप मैच ड्रॉ खेलकर अगले दौर में पहुंचना दुर्लभ है, लेकिन असंभव नहीं। केप वर्दे से पहले 1958 में वेल्स, 1990 में आयरलैंड और नीदरलैंड, और 1998 में चिली ने यह कारनामा किया था। हालांकि, 2010 में न्यूजीलैंड ने भी तीनों मैच ड्रॉ खेले थे, लेकिन वह बदकिस्मत रही और आगे नहीं बढ़ सकी थी।
केप वर्दे के कोच बुबिस्ता ने मैच से पहले जो कहा था, वह आज हकीकत बन चुका है। उन्होंने कहा था, “हर किसी को सपने देखने का अधिकार है और कुछ भी असंभव नहीं है।” मात्र 5 लाख की आबादी वाले इस देश की टीम ‘ब्लू शार्क्स’ ने असंभव को संभव कर दिखाया। स्टेडियम में मौजूद एक महिला प्रशंसक के हाथ में थमी तख्ती पूरी कहानी बयां कर रही थी, जिस पर लिखा था- “छोटे द्वीप, बड़े सपने।”
इस ऐतिहासिक कामयाबी के असली हीरो रहे 40 वर्षीय गोलकीपर वोजिन्हा। टूर्नामेंट में अपने जादुई प्रदर्शन से वह रातों-रात सोशल मीडिया स्टार बन गए हैं और इंस्टाग्राम पर उनके फॉलोअर्स की संख्या 1 करोड़ 60 लाख के पार पहुंच गई है। वोजिन्हा मैदान पर दीवार बनकर खड़े रहे। उन्होंने पहले हाफ के इंजरी टाइम में मोहम्मद कन्नो के खतरनाक हेडर को रोका, फिर 66वें मिनट में मोहम्मद अबू अल-शमत के शॉट का शानदार बचाव किया। खेल के अंतिम क्षणों में भी उन्होंने अब्दुल्ला अल-हमदान के गोल की ओर बढ़ते प्रहार को रोककर अपनी टीम का ‘विश्व कप सपना’ जिंदा रखा।
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