फुटबॉल में अब नहीं चलेगी ‘मुंह छिपाकर’ बदतमीजी, नस्लवाद पर FIFA का कड़ा प्रहार: लगेगा सीधा बैन!

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फुटबॉल में अब नहीं चलेगी 'मुंह छिपाकर' बदतमीजी, नस्लवाद पर FIFA का कड़ा प्रहार: लगेगा सीधा बैन!
फुटबॉल में Racism पर FIFA का बड़ा एक्शन, मुंह ढककर स्लेजिंग करने वाले खिलाड़ीयों पर लगेगा बैन

फुटबॉल का ‘विनीसियस लॉ’: अब मैदान पर जर्सी या हाथ से मुंह छिपाना पड़ेगा भारी!

फुटबॉल के मैदान पर अब खिलाड़ियों के व्यवहार और उनकी जुबान पर कड़ी निगरानी रहने वाली है। ताजा जानकारी के अनुसार, फीफा (FIFA) और अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल एसोसिएशन बोर्ड (IFAB) ने अपनी वार्षिक आम बैठक में एक क्रांतिकारी नियम को हरी झंडी दे दी है। इस नए नियम के तहत, अब मैदान पर खिलाड़ी विरोधियों से बात करते समय अपना मुंह जर्सी, हाथ या किसी भी अन्य वस्तु से ढक नहीं सकेंगे।

इस कड़े कदम के पीछे का मुख्य उद्देश्य नस्लवाद और मैदान पर होने वाले मौखिक दुर्व्यवहार को जड़ से खत्म करना है। अक्सर देखा गया है कि खिलाड़ी अपमानजनक या नस्लीय टिप्पणियां करते समय कैमरों और रेफरी की नजरों से बचने के लिए अपना चेहरा छिपा लेते थे, जिससे सटीक जांच करना लगभग असंभव हो जाता था। इस नए नियम के जरिए पारदर्शिता बढ़ाने और दोषियों की पहचान को आसान बनाने की कोशिश की गई है।

स्पेनिश मीडिया में इस प्रावधान को अनौपचारिक रूप से “विनीसियस लॉ” कहा जा रहा है। हाल ही में चैंपियंस लीग प्लेऑफ के पहले चरण में लिस्बन में खेले गए एक मुकाबले के दौरान यह मुद्दा गरमाया था। आरोप है कि जियानलुका प्रेस्टियानी ने विनीसियस जूनियर की ओर नस्लीय टिप्पणी करते हुए अपना मुंह जर्सी से ढक लिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, उस दौरान कथित तौर पर बेहद अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था।

इस घटना के बाद यूएफा (UEFA) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रेस्टियानी पर एक मैच का अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है और मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है। फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो भी कई मंचों पर कह चुके हैं कि नस्लवाद फुटबॉल के सामने सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है। हालांकि फीफा ने पहले भी कई एंटी-डिस्क्रिमिनेशन प्रोटोकॉल लागू किए हैं, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि इस समस्या को पूरी तरह समाप्त करने के लिए और भी कड़े कदम अनिवार्य हैं।

जानकारों के मुताबिक, यह नया नियम रेफरी, वीडियो असिस्टेंट और यहां तक कि लिप-रीडिंग तकनीक के जरिए अपशब्दों की पहचान को बेहद सटीक बना देगा। हालांकि, खेल जगत के कुछ पूर्व दिग्गजों ने इसे लागू करने के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर सवाल भी उठाए हैं। बहरहाल, फुटबॉल प्रशासन ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि खेल की भावना के खिलाफ किसी भी तरह का व्यवहार अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


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