मैदान पर हार और वतन में जंग: ईरान की महिला फुटबॉल टीम की मुश्किल डगर
ईरान की महिला फुटबॉल टीम के लिए एशियाई कप का सफर महज एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भावनाओं और संघर्षों का एक जटिल इम्तिहान बन गया है। ग्रुप चरण में अपना आखिरी मैच हारने के बाद अब यह टीम ऐसे समय में स्वदेश लौटने की तैयारी कर रही है, जब उनका देश युद्ध की विभीषिका में उलझा हुआ है। गौरतलब है कि जब यह टीम पिछले महीने ऑस्ट्रेलिया पहुँची थी, तब हालात ऐसे नहीं थे और ईरान पर हमलों का सिलसिला शुरू नहीं हुआ था।
आमतौर पर टूर्नामेंट से बाहर होने वाली टीमें चंद दिनों में अपने देश लौट जाती हैं, लेकिन ईरान की वापसी को लेकर फिलहाल आयोजकों ने कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है। ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के मुताबिक, टीम की मुख्य कोच मरजियेह जाफरी ने भावुक होते हुए कहा कि टीम “जितनी जल्दी हो सके ईरान लौटना चाहती है।”
जाफरी ने एक संवाददाता सम्मेलन में अपनी प्राथमिकता स्पष्ट करते हुए कहा, “मैं इस संकट की घड़ी में अपने देश और अपने घर के लोगों के साथ रहना चाहती हूं। हम जल्द से जल्द वापस लौटने के लिए बेताब हैं।”
मैदान के अंदर और बाहर खिलाड़ियों का व्यवहार भी चर्चा का विषय रहा। दक्षिण कोरिया के खिलाफ पहले मैच में राष्ट्रगान के दौरान टीम की ‘चुभती खामोशी’ को कुछ लोगों ने सरकार के प्रति विरोध माना, तो कुछ ने इसे देश के हालात पर शोक की अभिव्यक्ति करार दिया। हालांकि, टीम ने इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया। इसके बाद के मैचों में, जहाँ ईरान को ऑस्ट्रेलिया (0-4) और फिलीपींस (0-2) से हार झेलनी पड़ी, खिलाड़ियों ने राष्ट्रगान गाया।
खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं जताई जा रही हैं। ऑस्ट्रेलियाई-ईरानी परिषद ने ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री टोनी बर्क को पत्र लिखकर मांग की है कि टीम के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। परिषद द्वारा शुरू की गई एक ऑनलाइन याचिका पर रविवार तक 50 हजार से अधिक लोग हस्ताक्षर कर चुके थे। इस याचिका में अपील की गई है कि जब तक खिलाड़ियों की जान को खतरा महसूस हो, उन्हें ऑस्ट्रेलिया से जाने की अनुमति न दी जाए और उन्हें स्वतंत्र कानूनी व भाषाई सहायता उपलब्ध कराई जाए।
पूरे टूर्नामेंट के दौरान टीम प्रबंधन ने राजनीतिक स्थिति पर चुप्पी साधे रखी, लेकिन भावनाओं का सैलाब ज्यादा देर नहीं रुक सका। पिछले बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में फॉरवर्ड सारा दीदार अपने परिवार और संघर्ष झेल रहे देशवासियों का जिक्र करते हुए फूट-फूट कर रो पड़ीं।
वहीं, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने व्यक्तिगत संपर्क की बात तो गुप्त रखी, लेकिन स्पष्ट किया कि ऑस्ट्रेलिया इस कठिन समय में ईरानी महिला टीम के साथ एकजुटता से खड़ा है।
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