‘क्रिकेट का आखिरी मोर्चा’ फतह करने निकले स्टीव वॉ: यूरोप में शुरू हुई दिग्गज की नई जादुई पारी
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व महान कप्तान स्टीव वॉ की पहचान हमेशा एक ऐसे योद्धा की रही है, जो कठिन चुनौतियों के सामने कभी घुटने नहीं टेकते, बल्कि उन्हें जीत के जश्न में बदल देते हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद पिछले दो दशकों में वॉ ने कई सफल व्यावसायिक पिचों पर अपनी धाक जमाई है, लेकिन उनकी नवीनतम पारी ने खेल जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अभिषेक बच्चन की ‘यूरोपीय टी20 प्रीमियर लीग’ (ETPL) में एक फ्रेंचाइजी मालिक के रूप में कदम रखकर स्टीव वॉ ने केवल एक निवेश नहीं किया है, बल्कि यूरोपीय महाद्वीप में क्रिकेट की तकदीर और तस्वीर बदलने का बीड़ा उठाया है।
ईटीपीएल का आगाज उस क्षेत्र में क्रिकेट के लिए एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है, जिसे अब तक खेल के नक्शे पर हाशिए पर रखा गया था। इस महत्वाकांक्षी लीग में आयरलैंड, स्कॉटलैंड और नीदरलैंड के क्रिकेट बोर्ड सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, इसके मालिकों की सूची में ऑस्ट्रेलियाई हॉकी दिग्गज जेमी ड्वायेर, न्यूजीलैंड के पूर्व तेज गेंदबाज काइल मिल्स और विस्फोटक बल्लेबाज ग्लेन मैक्सवेल जैसे बड़े नाम शामिल हैं। ‘एम्सटर्डम फ्लेम्स’ फ्रेंचाइजी के मालिक के रूप में वॉ का जुड़ना उनके लिए रणनीतिक कौशल और व्यक्तिगत लगाव का एक अनूठा संगम है।
पीटीआई से खास बातचीत में वॉ ने अपने विजन को साझा करते हुए कहा, "मेरे लिए यूरोप क्रिकेट का आखिरी मोर्चा (Last Frontier) है और यही वजह है कि मैं इस मिशन का हिस्सा बना हूं।" उन्होंने आगे कहा कि ईटीपीएल से जुड़ने का फैसला काफी स्पष्ट था। क्रिकेट से दूर रहने के बाद पिछले 25 वर्षों से वह विभिन्न व्यवसायों, विशेषकर लेखन और पुस्तक प्रकाशन में व्यस्त रहे हैं। वॉ का मानना है कि यह चुनौती उनके पिछले अनुभवों से बिल्कुल अलग है, और वह क्रिकेट के मैदान पर किसी ठोस कारण के साथ वापसी करना चाहते थे।
स्टीव वॉ पहले भी मेंटोर की भूमिका में नजर आए हैं, लेकिन उनका मानना है कि ईटीपीएल एक ऐसा मंच है जो खेल के लिए नए रास्ते खोलेगा। उन्होंने उत्साह के साथ कहा, "यूरोप में क्रिकेट को एक नया आयाम देना, खेल का विस्तार करना और वहां से नई प्रतिभाएं तलाशना मुझे रोमांचित करता है। मेरा जुनून सिर्फ पुरानी यादों को ताजा करना नहीं, बल्कि एक ऐसा तंत्र खड़ा करना है जहां से स्थायी प्रतिभाएं निकल सकें।" वह आज भी एक ऐसी संस्कृति बनाने के लिए संकल्पित हैं, जो खिलाड़ियों को विकसित करे और जीत का जज्बा पैदा करे।
जब स्टीव वॉ से फुटबॉल की तर्ज पर क्लब क्रिकेट के बढ़ते प्रभाव और देश के ऊपर फ्रेंचाइजी को चुनने पर सवाल किया गया, तो उन्होंने बड़ी सादगी से टेस्ट क्रिकेट के प्रति अपना प्रेम जाहिर किया। उन्होंने कहा, "भले ही प्रारूप बदल रहे हों, लेकिन मैं आज भी टेस्ट क्रिकेट का मुरीद हूं। हम चाहते हैं कि खेल का यह सबसे बेहतरीन प्रारूप हमेशा जीवित रहे।"
वॉ के अनुसार, ईटीपीएल की सबसे बड़ी खासियत इसका भौगोलिक स्वरूप है। यूरोप में 30 से अधिक देशों में क्रिकेट खेला जाता है, जिनमें से कुछ पहले ही टी20 विश्व कप में अपनी छाप छोड़ चुके हैं। कई राष्ट्रीय बोर्ड और आईसीसी के समर्थन ने इस लीग को एक विश्वसनीय आधार दिया है। वॉ ने कहा, "यह क्षेत्र अब तक अनछुआ था, इसलिए यहां खेल को आगे बढ़ाने की असीम संभावनाएं हैं।"
वहीं, काइल मिल्स का मानना है कि यह लीग स्कॉटलैंड, आयरलैंड और नीदरलैंड के खिलाड़ियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। मिल्स ने जोर देकर कहा कि इन देशों में घरेलू क्रिकेट तो मजबूत है, लेकिन खिलाड़ियों को वैश्विक स्तर पर अपनी चमक बिखेरने के लिए जिस बड़े प्लेटफॉर्म की जरूरत थी, ईटीपीएल उन्हें वही एक्सपोजर प्रदान करेगी।
स्रोत- पीटीआई (Press Trust of India)
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