राहुल गांधी ने इस पूरे संकट को सरकार की “सामंतवादी सोच” का परिणाम बताते हुए कहा कि जब नीतियां कुछ गिने-चुने बड़े खिलाड़ियों के पक्ष में बनती हैं, तो उसका सबसे बड़ा नुकसान आम व्यापारी और कारीगर को उठाना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी राजनीतिक लड़ाई का मकसद इसी सोच को चुनौती देना है।
अपने बयान के अंत में राहुल गांधी ने भरोसा दिलाया कि वह देश के व्यापार की रीढ़ कहे जाने वाले वैश्य समाज के साथ मजबूती से खड़े हैं। उनका कहना है कि जब तक छोटे व्यापारियों की आवाज नीति-निर्माण तक नहीं पहुंचेगी, तब तक देश की अर्थव्यवस्था संतुलित और टिकाऊ नहीं बन सकती। इस वीडियो और संदेश के जरिए राहुल गांधी ने न सिर्फ सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं, बल्कि व्यापारियों के मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में लाने की कोशिश भी की है।
राहुल गांधी की व्यापारियों से बातचीत का पूरा वीडियो आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं।
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