बिहार में रोज़गार पर घमासान: सड़कों पर युवा, सत्ता में सन्नाटा?

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बिहार में रोज़गार पर घमासान: सड़कों पर युवा, सत्ता में सन्नाटा?
बिहार में नौकरियों को लेकर बवाल: बैरिकेड्स तोड़ आगे बढ़े छात्र, सरकार मौन क्यों?

सोमवार को बिहार की सड़कों पर छात्रों का आक्रोश गूंज उठा। पुलिस कांस्टेबल और अन्य सरकारी नौकरियों में भर्ती की कमी को लेकर युवाओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। छात्रों का आरोप है कि पिछले दो वर्षों से कोई नई भर्ती नहीं निकली है, जिससे उनका भविष्य अंधकार में है। उनकी मुख्य मांग है कि सरकार आगामी विधानसभा चुनावों से पहले नई भर्तियों के लिए अधिसूचना जारी करे। हालांकि चुनाव आयोग ने अभी तारीखों का ऐलान नहीं किया है, लेकिन अक्टूबर-नवंबर में चुनाव होने की संभावना है।

पटना में मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ते इन छात्रों की मांग थी कि बिहार पुलिस सब-ऑर्डिनेट सर्विस कमीशन (BPSSC) और सेंट्रल सिलेक्शन बोर्ड ऑफ कांस्टेबल (CSBC) की परीक्षाओं की उत्तर कुंजी छात्रों को मुहैया कराई जाए। प्रदर्शन के दौरान, छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के एक अधिकारी से मुलाकात कर अपनी बातें रखीं। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर छात्रों को रोकने की कोशिश की, लेकिन युवाओं का जोश इतना था कि कुछ जगहों पर वे बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ने में कामयाब रहे।

बैरिकेड पर चढ़कर अपनी आवाज़ बुलंद करती हुई एक प्रदर्शनकारी खुशबू पाठक ने पत्रकारों से कहा, “हमने कई बार इस अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाई है, लेकिन प्रशासन हमारी सुन नहीं रहा। इसलिए आज हमें यह कदम उठाना पड़ा। हमारा विरोध पूरी तरह से शांतिपूर्ण है।” उन्होंने एएनआई को बताया, “हम हाथ जोड़कर सरकार से अपनी मांगें पूरी करने की विनती करते हैं। BPSSC और CSBC को उत्तर कुंजी की कार्बन कॉपी और प्रश्न पुस्तिका देनी होगी और चुनाव से पहले बिहार इंस्पेक्टर का नोटिफिकेशन भी जारी करना होगा। हम शांति से मार्च कर रहे छात्र हैं।”

प्रदर्शन में शामिल एक और छात्र, नीतीश कुमार ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि दो साल से कोई भर्ती न आने के कारण पटना में रहकर पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने एएनआई को बताया, “हम अंदर जाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन हमें रोक रहा है। हम किसी सांसद या विधायक के बेटे नहीं हैं, हम गरीब किसानों के बेटे हैं, इसीलिए बिहार पुलिस परीक्षा की तैयारी करते हैं। दो साल से कोई वैकेंसी नहीं है, जिससे पटना में रहना बहुत मुश्किल हो गया है।” वहीं, बैरिकेड पर चढ़े एक अन्य प्रदर्शनकारी, अमन कुमार यादव ने दृढ़ता से कहा कि वे केवल मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव से ही मिलकर अपनी बात रखेंगे।


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