कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्रीप्रकाश जायसवाल का निधन, कानपुर में शोक की लहर
नई दिल्ली: कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल का कानपुर में लंबी बीमारी के बाद शुक्रवार को निधन हो गया। उनकी अचानक हुई मृत्यु से राजनीतिक गलियारों में गहरा शोक व्याप्त है। कांग्रेस पार्टी ने इसे एक अपूरणीय क्षति बताया है।
खड़गे ने जताया गहरा दुख, की श्रद्धांजलि अर्पित
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने श्रीप्रकाश जायसवाल के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, “यूपीए सरकार में मेरे सहयोगी रहे, वरिष्ठ कांग्रेस नेता श्रीप्रकाश जायसवाल जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। वे एक सच्चे और निष्ठावान कांग्रेसी थे जिन्होंने कानपुर के विकास व कल्याण के लिए पूरी ईमानदारी से जनसेवा का कार्य किया। उनका जाना कांग्रेस पार्टी के लिए भी एक बड़ी क्षति है। दुःख की इस घड़ी में उनके परिवारजनों व समर्थकों के प्रति मैं अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना करता हूँ।”
कानपुर के विकास के अग्रदूत
श्रीप्रकाश जायसवाल का जन्म 25 सितंबर 1944 को कानपुर में हुआ था और उनका राजनीतिक जीवन इसी शहर से जुड़ा रहा। उन्होंने तीन बार कानपुर से लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया (1999, 2004, 2009) और केंद्रीय मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। यूपीए-2 सरकार में उन्हें कोयला मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वहीं मनमोहन सिंह सरकार में वह गृह राज्य मंत्री भी रह चुके थे।
सिर्फ राजनीति नहीं, सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय
जायसवाल का योगदान केवल राजनीति तक सीमित नहीं था। वे सामाजिक कार्यों में भी गहरी रुचि रखते थे। मनमोहन सिंह सरकार में गृह राज्य मंत्री के तौर पर उन्होंने आंतरिक सुरक्षा, कानून व्यवस्था और गृह मंत्रालय से जुड़े अहम दायित्वों को कुशलतापूर्वक निभाया।
सार्वजनिक जीवन में लंबा अनुभव
श्रीप्रकाश जायसवाल ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 1989 में कानपुर शहर के मेयर के रूप में की थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल में आने से पहले, उन्होंने उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष (2000-2002) के रूप में पार्टी संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। करीब चार दशकों तक वे सक्रिय और प्रभावशाली राजनीति का हिस्सा रहे।
परिवार के साथ अंतिम क्षण
उनकी शुरुआती शिक्षा कानपुर के बीएनएसडी इंटर कॉलेज से हुई थी। 28 अप्रैल 1967 को माया रानी जायसवाल से उनका विवाह हुआ था। उनके दो बेटे, एक बेटी और दो पोते हैं, जो उनके अंतिम समय में उनके साथ थे। श्रीप्रकाश जायसवाल का जाना कांग्रेस के लिए एक बड़ी क्षति है, लेकिन कानपुर के विकास में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
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