शहर की जहरीली हवा: साँसों का संकट गहराया, प्रदूषण बना नई ‘सिगरेट’
शहर की हवा अब सिर्फ सांस लेने की जगह नहीं, बल्कि एक जानलेवा जाल बनती जा रही है। विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं कि वायुमंडल में कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, अमोनिया और बेंजीन जैसी खतरनाक गैसों का स्तर खतरनाक सीमा को पार कर चुका है। ये जहरीली गैसें केवल सांस लेने में परेशानी पैदा नहीं कर रही हैं, बल्कि हमारी आँखों, नाक, गले और फेफड़ों पर भी गंभीर और नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं।
डॉ. कुमार की मानें तो, स्थिति इतनी भयावह है कि जो कभी धूम्रपान को सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) का मुख्य कारण माना जाता था, आज वही प्रदूषण इस गंभीर बीमारी का सबसे बड़ा सबब बन गया है। उन्होंने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि यदि कोई व्यक्ति धूम्रपान से कोसों दूर भी है, तो भी वर्तमान प्रदूषण के स्तर के चलते वह हर दिन लगभग छह सिगरेट के बराबर जहरीले धुएं को अपनी साँसों में घोल रहा है। अनुमान के मुताबिक, एक सिगरेट जहां लगभग 64.8 एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) के बराबर प्रदूषण फैलाती है, वहीं वर्तमान में एक व्यक्ति अनजाने में ही सही, लगभग 5.83 सिगरेट के बराबर धुएं का सेवन कर रहा है। यह आंकड़े शहर की हवा में घुले ज़हर की भयावहता को दर्शाते हैं।
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