गोरखपुर का टेराकोटा: एक छोटे से गांव से विश्व मंच तक की यात्रा
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर का ‘एक जिला एक उत्पाद’ टेराकोटा, जो कभी एक छोटे से गांव औरंगाबाद की पहचान था, आज न केवल देश भर में बल्कि विश्व के कई देशों में भी अपनी अमिट छाप छोड़ चुका है। आगामी महीनों में आने वाले त्यौहारों, विशेषकर दिवाली के मद्देनज़र, टेराकोटा मूर्तियों की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है।
औरंगाबाद के कुशल शिल्पकार खूबलाल प्रजापति बताते हैं कि हालांकि इन मूर्तियों की मांग साल भर बनी रहती है, पर दिवाली के अवसर पर यह मांग कई गुना बढ़ जाती है।
विभिन्न राज्यों से प्राप्त हो रहे हैं ऑर्डर
खूबलाल प्रजापति के अनुसार, दिवाली में अभी कुछ समय शेष है, लेकिन अग्रिम मांग अभी से ही जोर पकड़ चुकी है। आंध्र प्रदेश, बेंगलुरु, गुजरात, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड जैसे कई राज्यों से ऑर्डर प्राप्त हो चुके हैं।
ऑर्डर पूर्ति हेतु कार्य जारी
खूबलाल प्रजापति बताते हैं कि इन ऑर्डरों को पूरा करने के लिए, मूर्तियां, दीपक, टेबल और अन्य कई वस्तुएं अभी से तैयार की जा रही हैं। इस पूरी प्रक्रिया में परिवार के सभी सदस्य सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।
किन वस्तुओं की है अधिक मांग?
जितेंद्र प्रजापति बताते हैं कि वर्तमान में कलश, पांच दीपक, नारियल, मनी प्लांट, कछुआ और टेबल जैसी वस्तुओं की मांग सबसे अधिक है।
विदेशों में भी है टेराकोटा की धूम
खूबलाल बताते हैं कि केवल भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी टेराकोटा की मांग बढ़ी है। अमेरिका, लंदन, ऑस्ट्रेलिया सहित कई अन्य देशों में इन मूर्तियों को हाथों-हाथ लिया जा रहा है।
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