पायलट की साख बचाने की मुहिम: पिता की गुहार, फेडरेशन का साथ, सुप्रीम कोर्ट में गूंजी आवाज
एक पिता का दर्द, अपने बेटे की इज्जत बचाने की जुझारू कोशिश। उनका मानना है कि विमान हादसे की वजह तकनीकी खामी, रखरखाव की अनदेखी या अन्य अनजाने कारण हो सकते हैं, लेकिन पायलट को बलि का बकरा बनाना कतई सही नहीं। यह गुहार आज सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची है।
इस संवेदनशील मामले में इंडियन पायलट फेडरेशन भी पायलट के पिता के साथ खड़ा है। फेडरेशन का कहना है कि पायलटों के सम्मान और सुरक्षा की खातिर एक निष्पक्ष जांच अनिवार्य है। वे इस बात पर जोर देते हैं कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को चार हफ्तों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई की तारीख बाद में तय की जाएगी। यह पूरा प्रकरण विमानन सुरक्षा की परतें खोलता है और जांच की प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल उठाता है। हादसे के बाद से हताहतों के परिजन और पायलट समुदाय एक साथ मिलकर न्याय की मांग कर रहे हैं, और अब उनकी उम्मीदें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


