संसद की दहलीज पर सपा का हल्लाबोल: अयोध्या विवाद से लेकर PDA की गूंज तक, मोदी सरकार की घेराबंदी
संसद भवन की सीढ़ियों पर गुरुवार को समाजवादी पार्टी के सांसदों ने विरोध का एक नया मोर्चा खोल दिया। अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर शुरू हुआ यह विरोध देखते ही देखते सरकार के खिलाफ तीखी बयानबाजी में तब्दील हो गया। सपा सांसदों का स्पष्ट आरोप है कि सरकार सदन में चर्चा से भाग रही है, जबकि इस गंभीर विषय पर गृह मंत्री अमित शाह को खुद जवाब देना चाहिए। विरोध प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं ने केवल अयोध्या ही नहीं, बल्कि झारखंड के छात्र आंदोलन से लेकर प्रयागराज में लोकतंत्र की आवाज दबाने जैसे कई मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
झारखंड के आंदोलन पर अवधेश प्रसाद की नजर
सांसद अवधेश प्रसाद ने झारखंड में उबलते छात्र आंदोलन पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्षी एकजुटता छात्रों के साथ है। उन्होंने बताया कि छात्रों की पांच सदस्यीय समिति राज्य सरकार से संवाद करने वाली है। प्रसाद ने संयम बरतते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से आने वाले आश्वासन के बाद ही कोई ठोस निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए, लेकिन छात्रों के हितों से समझौता बर्दाश्त नहीं होगा।
PDA का व्यापक फलक: ब्राह्मणों को साथ लेने की कवायद
समाजवादी पार्टी अपनी ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की रणनीति को नया विस्तार दे रही है। सांसद आनंद भदौरिया ने स्पष्ट किया कि पार्टी ने हमेशा ब्राह्मण समाज को सम्मान की नजर से देखा है। लखनऊ में ‘छोटे लोहिया’ जनेश्वर मिश्रा की जयंती का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सपा की विचारधारा समावेशी है। अखिलेश यादव के विजन को दोहराते हुए भदौरिया ने कहा कि PDA केवल तीन वर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शोषित सवर्ण, महिलाएं, आदिवासी और हर वह व्यक्ति शामिल है जो समाजवादी विचारधारा में विश्वास रखता है।
धर्मेंद्र यादव का प्रहार: ‘छात्रों की गूंज’ से डरी भाजपा?
प्रयागराज में कांग्रेस के ‘स्टूडेंट्स की गूंज’ कार्यक्रम की अनुमति रद्द होने पर सांसद धर्मेंद्र यादव ने सरकार पर करारा हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा छात्रों की आवाज और उनकी चर्चाओं से भयभीत है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ सरकार की बड़ी उपलब्धि थी, तो अब नए विधेयक की जरूरत क्यों पड़ रही है? विपक्ष ने साफ तौर पर सरकार की मंशा पर संदेह जताया है। उत्तर प्रदेश की राजनीति का जिक्र करते हुए धर्मेंद्र ने दावा किया कि मौजूदा शासन में सबसे अधिक प्रताड़ित ब्राह्मण समाज ही हुआ है।
सदन की सुस्ती और इकरा हसन के गंभीर आरोप
सांसद इकरा हसन ने संसद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मानसून सत्र में कामकाज के नाम पर खानापूर्ति हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन चलाने की जिम्मेदारी सरकार की है, लेकिन पुलिसिया बर्बरता जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा करने के वादे से सरकार मुकर रही है। इकरा ने PDA की परिभाषा को और स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें वे सभी ‘पंडित’ और सवर्ण भी शामिल हैं जो सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ हैं। उनके अनुसार, PDA एक बड़ा सामाजिक मंच बन चुका है।
अक्षय यादव और रामजी लाल सुमन की तीखी प्रतिक्रिया
सांसद अक्षय यादव ने परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने भाजपा को महिलाओं के अधिकारों का सबसे बड़ा विरोधी करार देते हुए कहा कि आंदोलनों के दौरान छात्राओं पर हुई पुलिस कार्रवाई सरकार के असली चेहरे को उजागर करती है। वहीं, सांसद रामजी लाल सुमन ने प्रयागराज की घटना को ‘तानाशाही’ का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की आवाज को पूरी तरह कुचलने का प्रयास कर रही है ताकि उनकी विफलताओं पर कोई सवाल न उठा सके।
समाजवादी पार्टी के इन तेवरों ने साफ कर दिया है कि वह सदन से लेकर सड़क तक सरकार को घेरने की अपनी रणनीति से पीछे हटने वाली नहीं है।
(इनपुट: आईएएनएस)
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