दलित न्याय की पुकार: राहुल गांधी ने हरिओम वाल्मीकि के परिवार से की मुलाकात, कहा – “अपराधियों जैसा व्यवहार क्यों?”
कानपुर से फतेहपुर तक, न्याय की आस में एक लंबी यात्रा
रायबरेली में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार दिए गए दलित हरिओम वाल्मीकि के परिवार को न्याय दिलाने की मुहिम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी उनके पैतृक आवास फतेहपुर पहुंचे। शुक्रवार को, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कानपुर से लगभग 80 किलोमीटर की सड़क यात्रा तय कर वाल्मीकि परिवार से मुलाकात की। इस दौरान, उन्होंने शोक संतप्त परिजनों को सांत्वना दी और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
“बिना गलती के सजा क्यों?” – राहुल गांधी का मार्मिक सवाल
पीड़ित परिवार के सदस्य चौधरी भक्त दास ने बताया कि राहुल गांधी ने परिवार के सदस्यों से बातचीत की और उनकी व्यथा सुनी। इस मुलाकात के बाद, राहुल गांधी ने गहरा दुख जताते हुए कहा, “कुछ दिन पहले हरियाणा के एक आईपीएस अधिकारी ने आत्महत्या की थी। मैं वहां गया था और आज मैं यहां आया हूं। इस परिवार ने कुछ भी गलत नहीं किया है। उनके बेटे और भाई की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। लेकिन इसके बावजूद इन लोगों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। इन्हें बाहर जाने की भी अनुमति नहीं दी जा रही।” उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “पूरे देश में दलितों पर अत्याचार हो रहे हैं।”
मुख्यमंत्री से कड़ी कार्रवाई की अपील
राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस गंभीर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों को सख्त सजा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह घटना अत्यंत निंदनीय है और ऐसे अपराधों को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
अवरोध और आक्रोश: प्रशासन पर मुलाकात रोकने के आरोप
राहुल गांधी कुछ समय तक हरिओम के घर के बाहर मौजूद रहे, लेकिन उन्हें परिवार से सीधे मुलाकात करने से कथित तौर पर रोका गया। इस दौरान, मौके पर कांग्रेस कार्यकर्ता जमा हो गए और उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर पीड़ित परिवार से मिलने से रोकने का आरोप लगाया, जिससे माहौल में तनाव बढ़ गया।
रायबरेली की क्रूर घटना: 2 अक्टूबर की वो काली रात
यह दुखद घटना 2 अक्टूबर को रायबरेली जिले के ऊंचाहार क्षेत्र में हुई थी, जब भीड़ ने हरिओम वाल्मीकि को पीट-पीटकर मार डाला। घटना के बाद, मारपीट और शव के वीडियो सामने आने से पूरे देश में व्यापक आक्रोश फैल गया था, जिसने दलितों के प्रति बढ़ते अत्याचारों पर फिर से बहस छेड़ दी है।
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